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लाखों खर्च करने के बाद भी शुद्ध पानी नसीब नहीं

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी राज्य की जनता को शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। कई जिलों में आज भी दूषित जल की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार का निर्देश है कि राज्य सरकार अपने क्षेत्र की जनता को पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाये।ड्ढr सर्वे के अनुसार कई जिलों में भूगर्भ जल में फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरन की मात्रा निर्धारित मापदंड से अधिक है। 1348 गांवों का भूगर्भ जल संक्रमित है। साहेबगंज जिले के 1गांव में आर्सेनिक की मात्रा .15 पीपीएम पायी गयी है। इस जल को पीने से यहां के लोग चर्म रोग और फोड़ा-फूंसी के शिकार हो चुके हैं। इस प्रकार के रोगों से सर्वाधिक पीड़ित आदिम जनजाति के लोग हैं। पलामू के 1113, गढ़वा के 63 और साहेबगंज के 24 गांवों के भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक है। वहीं सरायकेला के 48, पश्चिमी सिंहभूम के 81 और रांची के अधिकतर मुहल्लों में आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक पायी गयी है। भूगर्भ पेयजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की मात्रा कम करने के लिए उपयरुक्त क्षेत्रों के हैंडपंपों में एटेचमेंट यूनिट लगाने की बात कही गयी। इसके लिए केंद्र की ओर से विशेष राशि भी मुहैया करायी गयी, लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में कारगर कदम नहीं उठा सकी।

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