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घंटों इंतजार करते हैं चौधरी के रिश्तेदार

पाक के अपदस्थ चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी के 83 वर्षीय श्वसुर को पांच घंटे तक इंतजार करने के बाद सिर्फ दस मिनट के लिए अपनी बेटी और नातियों से मिलने की अनुमति दी गई। लेकिन जब जस्टिस चौधरी की साली समीरा मैरी ने मुलाकात की कोशिश की लेकिन उन्हें जस्टिस चौधरी की पत्नी की असली बहन होने के सबूत के तौर पर जन्म प्रमाणपत्र पेश करने को कहा गया। आखिरकार उन्हें चौधरी परिवार से मिलने नहीं दिया गया। समीरा ने द न्यूज को बताया, तीन नवंबर से मैं अपनी बहन और उसके बच्चों से टेलीफोन पर बात करती रही हूं लेकिन जब मैंने उनसे मिलने की कोशिश की तो मुझे रोक दिया गया जबकि सरकार दावा करती है किचौधरी के परिजनों को नजरबंद नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा, चीफ जस्टिस का घर बच्चों से भरा है जिसमें अधिकतर लड़कियां हैं। उन्हें नौकरों के भरोसे कैसे छोड़ा जा सकता है। यदि सरकार चौधरी के परिवार की रिहाई को लेकर वाकई चिंतित है तो मुझे और अन्य लोगों को मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार से मिलने क्यों नहीं दिया जाता? द न्यूज ने इस्लामाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सैयद कलीम इमाम से फोन पर इस बाबत पूछा तो उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश आजाद हैं और उनके परिजन भी उनसे मिल सकते हैं। ‘परिवार को मुशर्रफ की दया पर नहीं छोड़ सकता’ : उधर, जस्टिस चौधरी ने अपनी पत्नी और बच्चों को रिहा करने संबंधी सरकार की घोषणा को महज मजाक बताते हुए कहा कि यदि यह सच है तो वह अपने बच्चों को ऐसे लोगों के भरोसे नहीं छोड़ सकते जिन्हें नैतिकता का लिहाज ही नहीं है। जस्टिस चौधरी ने फोन पर बताया कि उन्हें चार महीने नजरबंद रखने के बाद ऐसी छूट का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, जब तक मैं आजाद नहीं होता। मैं अपने बच्चों को उनके भरोसे कैसे छोड़ सकता हूं। यह अपने बच्चों को खूंखार जानवरों वाले जंगल में छोड़ने जैसा होगा। उन्होंने कहा, मेरे परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। ऐसी स्थिति में जब मेरा टेलीफोन काट दिया गया है और मोबाइल सिम बंद कर दिया गया है, मैं कैसे जान पाऊंगा कि मेरे बच्चे स्कूल गए या नहीं।

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