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नेपाल की नदियों से बाढ़ रोकने को सरकार गंभीर

सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मंगलवार को विभागीय बजट पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि नेपाल की नदियों से पूर्वाचल में बाढ़ रोकने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज को पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि नेपाल सरकार के साथ 1में जिन परियोजनाओं को स्थापित करने पर बातचीत हुई थी, उसको क्रियान्वित कराया जाए। इसी महीने राज्य की बाढ़ नियंत्रण कमेटी की बैठक भी होगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल संसाधनों के विकास के विनियमन हेतु नियामक व्यवस्था लागू की जाएगी। तीन घंटे की बहस के बाद सिंचाई विभाग का बजट पारित हो गया।ड्ढr मंत्री ने कहा कि सरकार ने नहरों में सिल्ट सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए टीमें बनाकर सफाई से पहले और बाद में वीडियोग्राफी कराई गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार में वाटर रिस्ट्रक्चरिंग योजना की तरफ देखा नहीं जिसके कारण विश्व बैंक ने इसे रोक दिया था। उनकी सरकार की पहल पर 810 करोड़ की प्रथम चरण की इस परियोजना को दो साल के लिए बढ़ाया गया। साथ ही बुंदेलखंड के लिए दूसरे चरण की एक हजार करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि 670 नए राजकीय नलकूप लगाए जाएँगे। राजकीय नलकूपों के संचालन एवं अनुरक्षण की राशि उन्होंने 12 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रति नलकूप करने का निर्णय किया है। नहरों के प्रबंधन में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। जिससे नहरों की अवैध कटान नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पड़ताल के आधार पर ही किसानों से वसूली की जाएगी। मंत्री ने सरयू नहर परियोजना के चार सौ मीटर रुके होने की रिपोर्ट मँगवाने की बात कही। यह मसला सपा के वरिष्ठ सदस्य माता प्रसाद पांडेय ने उठाया था। कटौती पेश करते हुए भाजपा के वीरेंद्र सिंह सिरोही ने कहा कि सिंचाई की व्यवस्था ठीक नहीं होने से कृषि क्षेत्र कम हो रहा है।ड्ढr विभागीय अफसरों ने ही विभाग को दुहा है। उन्होंने ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जिनके कारण सरयू नहर परियोजना 220 करोड़ की लागत से बढ़कर 2708 करोड़ की हो गई। लोकदल के डा.अनिल चौधरी ने सूबे की जल नीति बनाने पर जोर दिया, ताकि बाढ़ के पानी का सूखे में उपयोग हो सके। उन्होंने किसानों को सिंचाई प्रबंधन से जोड़ने का विरोध करते हुए कहा कि इससे किसान आपस में लड़ेगा। इसके लिए नहर एक्ट में संशोधन करके विभागीय अधिकारियों के अधिकार बढ़ाने चाहिए।ं

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