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सर्वशिक्षा अभियान का साढ़े सात सौ करोड़ केन्द्र के पास बाकी

सर्वशिक्षा अभियान के साढ़े सात सौ करोड़ रुपये आज भी केन्द्र के पास बाकी हैं। इस मद में खर्च होने वाले 2400 करोड़ रुपयों में केन्द्र को 18 सौ करोड़ की राशि देनी थी जबकि राज्य सरकार को छह सौ करोड़। राज्य सरकार ने अपने हिस्से की राशि अग्रिम जमा कर दी लेकिन केन्द्र अब तक साढ़े दस सौ करोड़ ही दे पाया है। मानव संसाधन विकास मंत्री वृशिण पटेल ने उक्त जानकारी मंगलवार को विधान परिषद में दी।ड्ढr ड्ढr वे सदन में आय- व्यय पर हुई चर्चा का उत्तर दे रहे थे। इसके पूर्व मंत्री ने विभाग में रिक्त पड़े पदों से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए ज्योंही कहा कि वर्ष 2003 से तत्कालीन सरकार ने नियुक्त पर प्रतिबंध लगा दिया था, राजद के सभी सदस्य सदन से बाहर निकल गये। बाद में कांग्रेस के महाचंद्र सिंह ने कॉलेजों में रिक्त पड़े पदों का मामला उठाया तो मंत्री के जवाब से नाराज बाकी विपक्षी दलों के सदस्य भी सदन छोड़कर चले गये। लेकिन भाकपा के केदार पांडेय सदन में जमे रहे। मंत्री ने कहा कि सरकार जानती है कि राज्य की प्रगति के लिए शिक्षा जरूरी है , लेकिन हमारी विवशता है कि हमें शून्य से शुरू करना पड़ा। फिर भी दो वर्षों में राज्य में छात्र-शिक्षक अनुपात को 51:1 पहुंचा दिया गया है जबकि अभी एक लाख शिक्षकों की बहाली बाकी है। कार्यकारी सभापति ने कहा कि सरकारी स्कूलों की दशा आज भी नहीं सुधरी है और वहां वही बच्चे पढ़ने जाते हैं जो विवश हैं।ड्ढr ड्ढr मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सरकार चंद वषरे में सरकारी स्कूलों को ऐसा बना देगी कि निजी विद्यालय उनकी तुलना में कहीं टिक नहीं पाएंगे और वे खुद-ब-खुद बंद हो जायेंगे। राज्य में 24 लाख बच्चे स्कूल से बाहर थे। उनमें नौ लाख सरकार के प्रयास से स्कूल जाने लगे। बहस में भाग लेते हुए भाजपा के नरेन्द्र पांडेय, माकपा के बासुदेव सिंह, कांग्रेस के दिलीप चौधरी और राजद के रामबचन राय ने अकादमियों की दुर्दशा, शिक्षा नियुक्ित में गड़बड़ी और बीटीसी की पुस्तकें समय पर उपलब्ध कराने आदि पर चर्चा की।ं

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