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हाइड और 123 को साथ लेकर चलना होगा : बाउचर

हाइड कानूनों के मद्देनजर उठ रही आशंकाआें के बीच अमेरिका ने मंगलवार को भारत को परमाणु करार के कार्यान्वयन के दौरान इस कानून पर विचार किए जाने का सुझाव दिया है। अमेरिकी विदेश उप मंत्री रिचर्ड बाउचर ने संवाददाताआें से कहा कि हाइड कानून घरेलू है और 123 कानून अंतरराष्ट्रीय है। मुझे लगता है कि हम दोनों कानूनों को साथ लेकर चल सकते हैं। बाउचर ने संवाददाताआें के प्रश्न कि क्या भारत अमेरिकी परमाणु समझौते में हाइड कानूनों का रोल होगा, के जवाब में यह बातें कही।ड्ढr ड्ढr गौरतलब है कि बाउचर ने विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से परमाणु करार पर चर्चा की है। सरकार जोर देकर कह रही है कि अमेरिका के साथ परमाणु करार में हाइड एक्ट का कोई रोल नहीं होगा मगर वामपंथी और भाजपा इसे लेकर काफी चिंतित हैं। यह चिंता उस समय और बढ़ गई थी जब पिछले महीने विदेश मंत्री कोंडलीजा राइस ने कहा था कि भारत के लिए परमाणु व्यापार के वास्ते जरूरी एनएसजी दिशा-निर्देशों में परिवर्तन पूरी तरह हाइड कानून में वर्णित बाध्यताआें के मुताबिक होगा। उन्होंने कहा था कि अगर भारत का मामला हाइड कानून के मुताबिक नहीं हुआ तो अमेरिका उसका समर्थन नहीं करेगा लेकिन अमेरिकी सरकार ने कहा था कि हाइड कानून भारत पर बाध्यकारी नहीं होगा।ड्ढr ड्ढr विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राइस के बयान पर सोमवार को संसद में अपरोक्ष रूप से प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के असैनिक परमाणु करार से जुड़े अधिकार और बाध्यताएं 123 समझौते के तहत ही होगी। केंद्र की संपग्र सरकार को समर्थन दे रहे वाम दल हाइड कानून पर सरकार की दलील का सही नहीं मान रहे हैं। उन्होंने धमकी दी है कि अगर अमेरिका के साथ करार हुआ तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने संसद में मुखर्जी के बयान के बाद कहा था कि हम सरकार की इस दलील से सहमत नहीं है कि हाइड कानून का भारत पर असर नहीं होगा। बाउचर ने विदेश मंत्रालय में अमेरिका के संयुक्त सचिव गायत्री कुमार से बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने इस महत्वपूर्ण संबंध को अमलीजामा पहनाने के तौर-तरीके पर बातीचीत की है। मंगल पर मिली तूफान की तस्वीर, वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ीड्ढr ह्यूस्टन (प्रेट्र)। मंगल पर जीवन की संभावना तलाशने में जुटे वैज्ञानिकों को उस समय एक बड़ी उपलब्धि मिली जब ग्रह के उत्तरी ध्रुव पर उन्हंे तूफान की जानकारी मिली। हालांकि उन्हें यह जानकारी पहले भी मिली थी मगर पहली बार उन्हें इस तूफान की तस्वीर मिली। यह तस्वीर मंगल के अध्ययन के लिए गए नासा के अंतरिक्षयान ने ली है। तस्वीरों के बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक इनग्रिउ डाउबर स्पिटेल ने बताया कि हमें पहली बार ऐसी तस्वीर मिली है जिसमें तूफान साफ-साफ दिखाई दे रहा है। उत्तरी ध्रूव पर बादलों का एक बड़ा सा बबंडर दिख रहा है जिसमें बर्फ और धूल के कण दिखाई दे रहे हैं। मंगल पर इस तरह का कुछ देखना वाकई रोमांचक है। वह भी तब जब यहां पिछले कई लाख सालों में कोई भी परिवर्तन देखा नहीं गया है। पहली बार इस तस्वीर को देखने वाले स्पिटेल कहते हैं कि यह वाकई आश्चर्यचकित कर देने वाला है। तस्वीरों में लाल रंग की सतह जो दिखाई दे रही है वह पानी का बर्फ है जो ढलवां आकार में 700 मीटर तक चला गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न, स्विटजरलैंड के पैट्रिक रसेल का कहना है कि हालांकि हमें अब तक यह नहीं पता है यह ढाल यहां कैसे बनी है। यदि बर्फ के यह बड़े टुकड़े टूटते हैं तो संभव है कि उसमें से पानी निकले और उससे ठोस गैस में बदल जाए। हम देखेंगे कि आगे यहां और क्या-क्या होता है। हालांकि इससे हमें मंगल पर पानी के या जल चक्र को समझने में आसानी होगी। यह तस्वीर नासा के एमआरआे ने 1रवरी को ली थी और यह यान मंगल पर मार्च 2006 को पहुंचा था।

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