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अब कैं सर का इलाज जड़ी-बूटी से भी हुआ संभव

ैंसर रोगियों के लिए जड़ी-बूटी हर्बल थिरेपी ने चमत्कार कर दिया है। कैंसर का ‘ए’ से ‘जेड’ तक का इलाज अब जड़ी-बूटी से संभव होने जा रहा है। एक से दो वषर्ो के अंदर यह मरीजों को सुविधा पूर्वक उपलब्ध हो सकेगी। महावीर कैंसर संस्थान में स्वीस एलोविनो माउस पर किये जा रहे रिसर्च ने चमत्कार कर दिखाया है।ड्ढr ड्ढr इस कार्य में जुटीं रिसर्च विभाग की प्रभारी (महावीर कैंसर संस्थान) प्रोफेसर अखिलेश्वरी नाथ के साढ़े पांच वर्ष के अथक प्रयास के बाद यह सफलता हाथ लगी है। फिलहाल यहां 400 स्वीस एलविनो माउस पर अंतिम स्टेज पर रिसर्च चल रहा है। बिहार के लिए यह बड़े ही गर्व की बात है कि इस संस्थान को भारत सरकार द्वारा पहली बार जानवरों पर कोई रिसर्च, ब्रिड कराने एवं चीर-फाड़ का मान्यता दिया है।ड्ढr ड्ढr प्रोफेसर नाथ द्वारा पटना साइंस कॉलेज से हर्बल थिरेपी में रिसर्च किया गया था। इसके बाद इन्होंने अमेरिका से पोस्ट डाक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त की। वहां के टेक्सास यूनिवर्सिटी मंे ही उन्होंने जड़ी-बुटियों पर काम करने की ठान ली। इसके बाद भारत लौटते ही सरकार के निर्देश पर दिल्ली में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च सेन्टर में इस पर रिसर्च शुरू किया। इसमें काफी सफलताएं मिली। पिछले छह माह से प्रो. नाथ महावीर संस्थान में जानवरों पर सफ लतापूर्वक रिसर्च के दौरान चूहे में कीटनाशक दवा डालनी शुरू की। इसमें ट्यूमर निकल आये हैं। इसकी जांच के लिए उन्होंने चूहे को टाटा मेमोरियल भेजा, जहां स्पष्ट हुआ कि ये टय़ूमर कैंसर के हैं। उन्होंने बतलाया कि डीडीटी, मेटापोलोराइट डीडीटी एवं इंडोसकल्फा से ही अधिकांश टय़ूमर बनते हैं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि रिसर्च के क्र म मंे यह भी पाया कि मेल चूहों में नपुंसकता हो रही है, वहीं महिला चूहे में टय़ूमर निकल रहे हैं। इसके बाद हर्बल दवा से इसे सफलता पूर्वक टय़ूमर पर चार्ज किया गया, जिसमें उन्हें काफी सफलता मिल रही है। उन्होंने बताया कि रिसर्च में मात्र डेढ़ साल शेष बचे हैं। इसके बाद उस हर्बल को कैंसर मरीजों के लिए सार्वजनिक किया जायेगा। उन्होंने बताया कि हर्बल में हल्दी, अश्वगंधा एवं आंवला काफी महत्वपूर्ण हैं, जो इस इलाज के लिए कारगर साबित हांेगे। इसके बाद भारत सरकार से हल्दी, अश्वगंधा एवं आंवला को पेंटेंट कराने की योजना है।ड्ढr उन्होंने आमजनों से आग्रह किया है कि यहां की मिट्टी एवं पानी में डीडीटी की मात्रा अधिक है, इस कारण पानी को जहां से संभव हो गर्म करके ही प्रयोग में लाएं।ं

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