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सरबजीत की माफी याचिका खारिज, वापसी की आस टूटी

सरबजीत सिंह की क्षमा याचिका को राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खारिज कर दिया। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान का दावा है कि सरबजीत वास्तव में एक भारतीय जासूस मंजीत सिंह है जिसे 10 में लाहौर और मुल्तान में हुए बम धमाकों के लिए फांसी का सजा सुनाई गई। इन धमाकों मंे 14 लोगों की मौत हो गई थी। अब कभी भी सरबजीत के खिलाफ ब्लैक वारंट जारी हो सकता है। सरबजीत की क्षमा याचिका को ठुकराए जाने की खबर मिलते ही उसके पैतृक कस्बे भीखीविंड में मायूसी छा गई। हालांकि उसकी बहन दलबीर कौर ने कहा कि उनके पास क्षमा यााचिका ठुकराए जाने के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया, ‘इस तरह की खबरें मिलने के बाद मैंने पाकिस्तान में सरबजीत के वकील और साथ ही पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी से बातचीत की लेकिन दोनों ने ही अब तक की इसकी पुष्टि नहीं की है। बर्नी ने तो यह भी कहा कि राष्ट्रपति के दफ्तर से इस बारे में पुष्ट जानकारी मिलने पर वह हमसे संपर्क करेंगे।’ दलबीर कहती हैं कि इसी तरह के आरोप में सजाए मौत का सामना कर रहे कश्मीर सिंह की रिहाई और स्वदेश वापसी ने उनकी उम्मीदें बढ़ा दी थीं। जब कश्मीर सिंह को अटारी सीमा पर छोड़ा गया तो बर्नी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह सरबजीत की रिहाई की हर मुमकिन कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को फै क्स भेजकर कहा है कि अगर पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने मेरे भाई की क्षमा याचिका ठुकरा दी है तो भारत सरकार को तुरंत पाकिस्तान सरकार के समक्ष यह मामला उठाना चाहिए।’ सरबजीत की बेटी पूनम ने कहा, ‘मैंने अपने पिता की क्षमा याचिका को ठुकराए जाने के बारे में सुना है। मेरे पिता बेकसूर हैं। मेरी पाकिस्तान सरकार से विनम्र विनती है कि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करे।’

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