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साहित्य में नई संभावना

हिन्दी साहित्य के बारे में शायद ऐसी गलतफहमी है कि साहित्यकार साहित्य और किताबों में ही डूबे रहते हैं। या हो सकता है कि यह गलतफहमी हो कि ऐसी गलतफहमी है, लोग असलियत जानते हों। बहरहाल, मुद्दा यह है कि लेखक सिर्फ लिखने पढ़ने में ही नहीं डूबे रहते, वे काफी सारी ‘एक्ट्रा कैरिक्यूलर’ गतिविधियां भी करते हैं, बल्कि उनका मुख्य काम ये ‘एक्ट्रा कैरिक्यूलर’ गतिविधियां ही हैं।कुछ लोग तो साहित्य इसलिए लिखते हैं ताकि इन एक्ट्रा कैरिक्यूलर गतिविधियों के लिए पात्रता हासिल कर लें। जो लोग बिना पढ़े-लिखे ऐसा कर सकते हैं, वे लिखने-पढ़ने जैसे कामों में नहीं पड़ते। इसलिए यह एक विनम्र राय है कि साहित्य की सामाजिकता या संस्कृति या राजनीति या शरीर विज्ञान या जीव विज्ञान या जो भी कुछ जानना हो उसे जानने के लिए लिखित साहित्य से ज्यादा इन गतिविधियों का विश्लेषण करना जरूरी है।यूं भी साहित्य की आलोचना और विश्लेषण जो कुछ लिखा गया है उससे ज्यादा जो कुछ किया गया है उससे ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में साहित्य से जुड़ी कुछ खबरें ऐसी मिलती हैं, जिन्हें पढ़कर साहित्य के भविष्य के उज्ज्वल होने के संकेत मिलते हैं। ऐसी ही एक खबर यह है कि विदेश में कुछ साहित्यकार गए थे, जहां एक साहित्यकार की जेब से दूसरे साहित्यकार ने पांच सौ डॉलर चुरा लिए। इस संदेह की तस्दीक इस आधार पर हुई कि दूसरे साहित्यकार को बार-बार होटल के कैसिनो में जाते देखा गया। पहले साहित्यकार सिर्फ किताबें चुराते थे, दूसरों की रचनाएं चुराने का भी चलन कभी था, लेकिन आजकल नहीं है। शायद लेखकों ने पाया कि सामान्यत: साहित्य का स्तर इतना गिर गया है कि उतने स्तर का हर कोई लिख लेता है तो फिर चुराने से क्या फायदा। अब तक मामला सिर्फ किताबों की चोरी तक ही था, लेकिन इन लेखक महोदय ने एक बड़ी संभावना का दरवाजा खोला है। कहते हैं कि हर बड़ी चीज की शुरुआत छोटी ही होती है, सो हम उम्मीद करें कि यह छोटी शुरुआत बड़ी चीजों की आेर ले जाए। लेखक बड़ी-बड़ी चोरियां करें, डाके डालें और सफल बनें। बाल्जाक का एक कथन है, जो मारियो पूजो ने उपन्यास गॉडफादर में उद्धृत किया है- हर बड़ी सफलता के पीछे एक बड़ा अपराध होता है। अभी हम छोटे अपराध के आगे छोटी सफलता की उम्मीद करेंगे। एक दिन हिन्दी के लेखक इतने बड़े अपराध करेंगे कि उनसे बड़ी सफलताएं हाथ लगेंगी। हिन्दी के मल्टीनेशनल कापर्ोरेशन होंगे। हमारे अपने सचमुच के माफिया और गॉडफादर होंगे, चेयरमैन और सीईआे होंगे। एक दिन आएगा जब हमें छुटभैए लेखकों को माफिया और गॉडफादर नहीं कहना होगा।

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