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कमाना है तो खेलो क्रिकेट

रोजगार के क्षेत्र में मोटी कमाई के लिहाज से क्रिकेट खेलना भी जोरदार जरिया बन गया है, यदि ऐसा न होता, तो क्रिकेटरों को खरीदने के लिए नामी हस्तियां व कम्पनियां माल न लुटाती। नि:संदेह आईपीएल नीलामी ने अभिभावकों की आंखों में चमक पैदा कर दी है। अब वे यही दुआ करेंगे कि उनकी संतानें पढ़ने लिखने में समय बर्बाद न करके क्रिकेट के मैदान में क्रिकेट खेलें, सीखें तथा नीलामी में अपनी बोली बढ़वाएं।ड्ढr डॉ. सुधाकर आशावादी, ब्रह्मपुरी, मेरठ धार्मिक यात्राआें पर अनुदान धार्मिक यात्राआें पर दी जाने वाली सरकारी अनुदान राशि के बारे में मुकाबला से बहुत उपयोगी मुद्दा सामने आया। सरकार को अनुदान (सब्सिडी) देने का अधिकार है या नहीं। दरअसल, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म का विरोध नहीं है। धार्मिक यात्रा करना हर व्यक्ित का संविधान प्रदत्त अधिकार है। इसका उपयोग हर नागरिक कर सकता है। हज सब्सिडी मुसलमानों को दी जाती है वह धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं, वरन भारतीय मुसलमानों को व्यक्ितगत राहत देने के लिए है। क्या ऐसी सब्सिडी ईसाइयों, बौद्धों, सिखों, हिन्दुआें तथा अन्यों को भी दी जा सकती है। स्पष्ट है कि ‘हां’ दी जाती है। प्रतिवर्ष हजारों भारतीय मुसलमान एक फर्ज ‘हज’ करने जाते हैं। वहां पूरे विश्व के मुसलमान इकट्ठा होते हैं। मुसलमानों को जब वहां मालूम होता है कि मात्र हिन्दूबहुल धर्मनिरपेक्ष भारत ही धार्मिक अल्पसंख्यकों को हज के लिए अनुदान देता है, तो देश की नीतियों को सम्मान मिलता है। जो काम अरबों-खरबों के विज्ञापन नहीं कर सकते, वह कार्य अनुदान राशि कर देती है।ड्ढr ठाकुर सोहन सिंह भदौरिया, मुख्य डाकघर, बीकानेर आम आदमी का रेल बजट घाटे में जाती हुई रेलगाड़ी को रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सिर्फ पुनर्जीवित ही नहीं किया है, बल्कि विभाग का मुनाफा भी सालों साल लगातार बढ़ाया ही है। और ये उनका जादुई करिश्मा ही है कि रेल के मुसाफिरों की सुविधाआें को बढ़ाते हुए व किराए को कम करते हुए, लगातार पांचवीं बार उनका बजट आम आदमी की जरूरतों और आशाआें के अनुरूप रहा है।ड्ढr आसिया, इन्द्रा पार्क, पालम, नई दिल्ली सिर पर छत भी दो बुजुर्गो को सरकार कहती है कि वह वृद्धों के लिए बहुत कुछ कर रही है। कभी सीनियर सिटीजन्स के लिए 50 प्रतिशत ब्याज दर बढ़ा देती है उनकी बचत पर, कभी आयकर में छूट दे देती है वह भी 65 वर्ष की उम्र के बाद। रेल में भी 25 प्रतिशत की छूट है। मेरी छोटी सी बुद्धि में ये समझ में नहीं आता है कि इन कार्यवाहियों से कितने प्रतिशत वृद्धों को लाभ पहुंचता होगा। शाायद 2 प्रतिशत या 3 प्रतिशत। ऊंट के मुंह में जीरा। कितने बुजुगरे के पास बैंक में जमा करने को पैसा है, कितने आयकर की परिधि में आते हैं। कितने बुजुर्ग रेल द्वारा यात्रा करते हैं। निर्बल बुजुगरे को शासन की आेर से 600 रु. मासिक पेंशन प्राप्त होती है। वह भी कितने पापड़ बेलकर मिलती है सभी जानते हैं। वैसे आज के जमाने में 600 रु. का आदमी एक बार में भोजन कर जाता है। मेरा एक ही कहना है कि खाने पीने का जुगाड़ जैसे-तैसे आदमी कर लेता है। दस रुपए में भी भोजन मिल जाता है। लेकिन जिसके पास छत नहीं, वह वास्तव में लाचार है। मेरा सुझाव है कि हर बजट में वृद्धों के लिए निवास की सुविधा का प्रावधान किया जाना चाहिए। और यह हर स्तर पर होना चाहिए जैसे केन्द्र, राज्य, कमिश्नरी, जिला एवं म्युनिसिपेलिटी स्तर पर। इसके लिए बजट का प्रावधान होना चाहिए। कमरों व डोरमेटरी की बिजली पानी सहित व्यवस्था होनी चाहिए।ड्ढr यू. सी. पाण्डे, सेक्टर-10, द्वारका, नई दिल्ली क्षेत्रीय राजनीति अनुचित मुम्बई में इन दिनों महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ता राज ठाकरे के आदेश पर ही उत्तर भारतीयों पर अपना कहर ढा रहे हैं। राज ठाकरे मुम्बई में केवल मराठी संस्कृति से जुड़े लोगों के अलावा अन्य वर्ग को नहीं देखना चाहते। क्या हजारों फिल्मी कलाकार, उद्योगपति या सड़क पर मूंगफली बेचने वाले मुम्बई के हित में, उसकी उन्नति में अपना हिस्सा नहीं देते? राज ठाकरे का यह दुराग्रह कि महाराष्ट्र में केवल मराठी पर्व ही मनाएं नितान्त अनुचित है।ड्ढr युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव, हरियाणां

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