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कृषि नीति पर हावी राजनीति विकास में बाधक : पवार

ेंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि कृषि के जरिये ही समग्र विकास संभव है और गरीबी व भुखमरी से निजात पाने में इससे बड़ा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन कृषि विकास के रास्ते में बाधक बन कर खड़ी असली चुनौती इस क्षेत्र से बाहर है। यह बाधा है कृषि नीतियों के निर्धारण में राजनीति का हावी रहना। उन्होंने कहा कि भारत सहित अधिकांश सार्क देशों में कृषि की सालाना विकास दर दो फीसदी या उससे कम बनी हुई है जबकि सेवा व उद्योग क्षेत्र 8 से 12 फीसदी की दर से बढ़ रहे हैं। इसके चलते शहरी और ग्रामीण के साथ गैर-कृषि और कृषि पर निर्भर लोगों के बीच आय की असामनता बढ़ती जा रही है। इस अंतर को कम करने की जरूरत है। बुधवार को यहां विज्ञान पर आधारित खेती के जरिए सार्क देशों में गरीबी और भुखमरी उन्मूलन पर दक्षिण एशियाई सम्मेलन, 2008 का उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री ने यह बातें कहीं। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन कृषि मंत्रालय, इफको फाउंडेशन और आईसीएआर ने संयुक्त रूप से किया है। उन्होंने कहा कि सार्क देशों ने खाद्यान्न उत्पादन के मोर्चे पर सफलता हासिल की है। हरित क्रांति के जरिये उत्पादकता और उत्पादन में हुई बढ़ोतरी इसकी वजह रही लेकिन अब हरित क्रांति के फायदे गायब हो रहे हैं। उत्पादकता की विकास दर घट रही है। जिसका कारण किफायती दामों पर कृषि आदानों की अनुपलब्धता और पोषक तत्वों का सही उपयोग नहीं होना है। पवार ने कहा कि सार्क देशों में 60 फीसदी से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। भूटान और नेपाल के मामले में तो यह 0 फीसदी है। किसानों की आय बहुत कम बनी हुई है। पचास फीसदी से अधिक सीमांत और लघु किसान गरीबी रेखा से नीचे हैं। कम आय इनके स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के बदतर स्तर की मूल वजह है। यह बात साबित हो चुकी है कि गरीबी उन्मूलन और समावेशित विकास के बेहतर परिणाम कृषि विकास से ही आते हैं। गैर-कृषि क्षेत्रों का विकास इसमें प्रभावी नहीं है। सार्क देशों के बीच व्यापार का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के बीच अंतरक्षेत्रीय व्यापार जीडीपी का मात्र 0.8 फीसदी है। जबकि पूर्वी एशियाई देशों के बीच यह 27 फीसदी है। ऐसे में साफ्टा के औचित्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि की जटिल हो चुकी समस्या के हल के लिए हमें तकनीक और वैज्ञानिक शोध का बड़े स्तर पर सहारा लेना होगा। इसके जरिये ही उत्पादकता में बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है। शोध एवं विकास के स्तर पर भी सभी सार्क देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

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  • Web Title: ‘कृषि नीति पर हावी राजनीति विकास में बाधक’