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स्वागत के लिए लाए गए थे भाड़े के लोग

विश्व कप विजेता अंडर 1टीम के स्वागत के लिए यहां कोई खास भीड़ नहीं थी, तिस पर खबर है कि जितनी थी वह भी भाड़े में लाई गई थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब भाड़े पर लाए गए लड़कों ने नाराजगी जताई कि उन्हें लड़कियों से कम पैसे मिले हैं। पता चला है कि हवाई अड्डे पर स्वागत का समा बांधने के लिए 80 लड़के एवं लड़कियों को पैसे देकर लाया गया था। इसके लिए लड़कियों को 1000 रुपए और लड़कों को केवल 200 रुपए दिए गए। ये लोग तिरंगा लेकर टीम का इंतजार कर रहे थे और टीम के आने पर ये जोर से शोर मचाने लगे। इन्हें यही निर्देश था। ये डय़ूटी कर रहे थे। सितारों के लिए ललक अलग ही होती है। उनके लिए पैसे देकर भीड़ नहीं जुटानी पड़ती। यही कारण है कि मुम्बई में क्रिकेट बोर्ड को सिर्फ 20-20 चैंपियन टीम को हवाई अड्डे से वानखेडे स्टेडियम लाने के प्रबंध करने पड़े। बाकी भीड़ खुद ब खुद राहों में बिछ गई। वानखेडे स्टेडियम खचाखच भर गया। बारिश के बावजूद सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग टीम के साथ चलने लगे और स्टेडियम पहुंचने में कई घंटों की देरी हो गई। इधर, बेंगलूरू में भी भारत की अंडर 1टीम के स्वागत की तैयारियां कुछ उसी तर्ज पर थीं पर इस टीम में सितारे नहीं थे। शायद इसका अहसास आयोजन का जिम्मा संभाल रहे लोगों को भी था। शो फ्लाप न हो जाए इसके लिए उन्होंने कुछ और भी इंतजाम कर डाले। कालेज से छात्र छात्राओं को पैसे देकर लाना उनका विशेष इंतजाम था। बाकी बेंगलूरू में ऐसा कोई विशेष जोशो-जुनून नहीं था। लोगों को पूछा तो उन्हें पता ही नहीं था कि टीम आने वाली है। कौन सी टीम? यह सवाल था। पुलिस लगी थी और वह ही बता पा रही थी कि शायद छह बजे तक कोई टीम स्टेडियम पहुंचेगी। बेंगलूरू में विश्व विजेता अंडर 1टीम के लिए प्रशंसकों का कमजोर स्वागत देखते हुए शंका होती है, कहीं इस टीम का भविष्य भी 2000 की विश्व विजेता टीम जैसा न हो। ट्वेंटी-20 विश्व कप विजेता टीम के खिलाड़ियों के नाम तो लाखों करोड़ों प्रशांसकों की जुबान पर थे। लेकिन दूसरी ओर अंडर 1टीम के खिलाड़ियों को बहुत कम लोग पहचानते हैं। केवल विराट कोहली ही विराट स्वरूप लिए हुए हैं जबकि अजितेश अर्गल, रविंदर जडेजा, सिद्धार्थ कौल, तन्मय श्रीवास्तव जैसे शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी कोई पहचान नहीं रहा था। विराट अपने स्वागत से संतुष्ट नजर आए। हालांकि कोच डेव व्हाटमोर ने आशा जताई कि यह टीम भविष्य की सीनियर टीम होगी लेकिन अब देखना ये होगा है कि इस टीम में से कितने खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने में कामयाब हो पाते हैं?

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