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अस्वीकृत पदों पर पदस्थापित नये व्याख्याता परेशान

जेपीएससी की अनुशंसा पर नये व्याख्याताओं का पदस्थापन तीनों विश्वविद्यालयों में कर दिया गया है। रांची यूनिवर्सिटी में दर्जनों नये व्याख्याताओं का पदस्थापन कॉलेजों में अस्वीकृत पदों पर हुआ है। इससे ये व्याख्याता अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। विवि प्रशासन से शिकायत करने पर उन्हें कहा जा रहा है कि फिलहाल वे अपने पद पर योगदान दें, बाद में देखा जायेगा। कुछ विवि अधिकारी संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यो को उनके अधिकार बताते हुए कह रहे हैं कि यह सब कुलपति के आदेश पर हुआ है, इसका पालन हो। दूसरी ओर प्राचार्यो ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अस्वीकृत पदों पर व्याख्याताओं को योगदान देने की अनुमति दे रहे हैं, लेकिन कॉलेज में जब स्वीकृत पद रिक्त होंगे, तब ही उनका भविष्य सुरक्षित होगा। उधर सरकार का रुख भी इस मामले में स्पष्ट है कि अस्वीकृत पदों पर कार्यरत शिक्षकों के वेतन के लिए वह राशि नहीं देगी। विवि अपने स्तर से भुगतान करे। शहरी क्षेत्र के कॉलेजों में अतिरिक्त शिक्षकों के पदस्थापन के कारण ग्रामीण कॉलेजों में शिक्षकों के दर्जनों पद रिक्त रह गये हैं। विवि प्रशासन रिक्त रह गये पदों की वेतन राशि ही अस्वीकृत कॉलेजों के शिक्षकों को दे सकता है।ड्ढr हालांकि सरकार भी इस मामले को अपने स्तर पर देख रही है। शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि विवि से पदस्थापन सूची प्राप्त होने के बाद विवि के रिक्त पदों की सूची से मिलान के बाद ही वेतन राशि तय की जायेगी। विवि के एक आदिवासी टॉपर को रांची से बाहर भेजे जाने को राजभवन ने भी गंभीरता से लिया है। कुलाधिपति पहले ही कई बार ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों की कमी दूर करने का निर्देश विश्वविद्यालयों को दे चुके हैं।ं

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