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कांग्रेस की सोशल ऑडिट टीम को बंधक बनाया

राज्य सूचना आयोग में चल रहे घपलों की पड़ताल करने पहुँची सोशल आडिट टीम के कार्यकर्ताआें को आयोग ने बुधवार को बंधक बना लिया। यह ड्रामा काफी देर चला। बाद में आयोग ने छह सामाजिक कार्यकर्ताआें के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी। आयोग के इस रवैए से नाराज आडिट टीम ने राज्यपाल से शिकायत कर मुख्य सूचना आयुक्त को हटाने की माँग की है।ड्ढr कांग्रेस सूचना का अधिकार सोशल आडिट टीम के प्रभारी कैप्टन एसजेएस मक्कड़ सूचना का अधिकार एक्ट की धारा 2 (जे) के तहत आयोग की कुछ पत्रावलियों को निरीक्षण करना चाहते थे। उन्हें शिकायत मिली थी वादियों को सही समय पर सूचनाएँ नहीं भेजी जा रहीं। आयोग के कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं। टीम आर्थिक दण्ड, उनकी वसूली और माफी की भी फाइलें देखना चाहती थी। सोमवार को मुख्य सूचना आयुक्त एमए खान ने उन्हें सोशल आडिट करने की इजाजत दे दी। आडिट में टीम ने पाया कि आयोग के हाजरी रजिस्टर पर उपस्थिति के कई कॉलम खाली हैं।ड्ढr टीम ने रजिस्टर के इन पन्नों की प्रतिलिपि माँगी। टीम ने मंगलवार को भी आयोग के दस्तावेज देखे। टीम जब बुधवार को आडिट करने पहुँची तो मुख्य सूचना आयुक्त ने टीम के सदस्यों को अपने कमरे में बुलवा लिया। श्री मक्कड़ ने बताया कि श्री खान ने टीम के सदस्यों से अभद्रता की। उन्होंने कहा कि ‘आप लोग कौन होते हैं आडिट करने वाले।’ श्री मक्कड़ के मुताबिक मुख्य आयुक्त ने सुरक्षा में लगी पुलिस को बुलाकर सबको कमरे में बंद करा दिया। इतने में एक अखबार का फोटोग्राफर वहाँ आया तो उसे भी कमरे में बंद कर लिया गया। आडिट टीम के सदस्यों ने हंगामा किया तो उन्हें थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया।ड्ढr बाद में आयोग के सचिव ने टीम के सदस्यों विवेक राय, अवनीश शुक्ल, अभय सागर, अभिषेक सिंह व अन्य के खिलाफ हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उधर सोशल आडिट टीम ने राजभवन जाकर इस घटना की शिकायत की। टीम ने एक ज्ञापन देकर श्री खान के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बाद में टीम के सदस्य श्री खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने हजरतगंज थाने पहुँच गए। इस घटना के बारे में पूछे जाने पर मुख्य सूचना आयुक्त एमए खान ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि आडिट के नाम पर टीम के सदस्य महिला कर्मियों के साथ अभद्रता कर रहे थे। वह पत्रावलियों की फोटो खींच रहे थे। उन्होंने कहा कि यह आयोग है किसी सरकारी विभाग का दफ्तर नहीं। उन्होंने कहा कि भीड़ को इस तरह आकर आडिट करने का अधिकार नहीं।

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