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‘स्वदेशी’ की भावना उफान पर, खादी को लगे पंख

नगर निगम का चुनाव आ गया। जो विधायक -सासंद बनने की चाहत रखता था नहीं बन पाने की स्थिति में पार्षद बन कर दिल के अरमान पूरे करना चाह रहा है। अब तक चौक चौराहों पर यार दोस्तों के साथ कागर्ो पैंट और स्लीवलेस गंजी पहन कर स्मार्ट बने हुए थे। कौन अगल बगल से गुजर रहा है कोई ख्याल नहीं रहता था। ठहाकों में क्या बोल जाते थे वही समझते थे। अब चुनाव लड़ रहे है। निगम के बहाने ही विधानसभा, लोकसभा का रास्ता भी तैयार कर रहे हैं। नेतागिरी में उतरे हैं तो कम से कम स्मार्टनेस वाला चोला भी बदलना होगा। जब तक जनता यह नहीं जानेगी कि नेता जी में स्वदेशी की भावना कूटकूट कर भरी हुई है, गांधियन भी है तब तक वोट नहीं देगी। क्योंकि वेश ही भीख मिलता है। निगम का चुनाव क्या आया कि स्वदेशी की भावना युवकों में घर कर गयी। रेंगलर की जींस और पार्क एवेन्यू शर्ट पहनने वाले धकाधक खादी की आेर भागने लगे। खादी की दुकानों पर उम्मीदवारों और उनके सहयोगियों की भीड़ बढने लगी। इसी बहाने खादी व्यवसाय को भी पंख लग जा रहा है। अब तो जिधर देखिये खद्दरधारियों की बाढ़ नजर आ रही है। ऐसे ही निगम का चुनाव होता रहे, तो विदेशी वस्त्रों पर ग्रहण लग जायेगा क्योंकि अब ये भावी पार्षद और डिप्टी मेयर समाज में युवकों के आदर्श बनेंगे तो जो नेता जी धारण करेंगे वही उनके समर्थक भी अपनायेंगे।

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