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विप चुनाव में भाग ले सकेंगे वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक

एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों के लगभग दो लाख 30 हजार शिक्षकों के विधान परिषद चुनाव में शामिल होने का मार्ग साफ कर दिया है। पीठ का कहना है कि ये शिक्षक 15 दिनों के भीतर जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रत्यावेदन प्रेषित करेंगे जो इसका निस्तारण करेंगे। यह सारी कसरत चुनाव से एक महीने पहले पूरी कर ली जाएगी।ड्ढr न्यायमूर्ति प्रदीपकान्त तथा न्यायमूर्ति श्री नारायण शुक्ला की खण्डपीठ ने यह फैसला वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालय प्रबन्धक महासभा की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर एडवोकेट एलपी मिश्रा की विस्तृत दलीलों को सुनने के पश्चात बुधवार को सुनाया।ड्ढr गौरतलब है कि प्रदेश के लगभग 1037 वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों में लगभग दो लाख 30 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जो विधान परिषद चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे थे। चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार परिषद के चुनावों में वही विद्यालय और शिक्षण संस्थाएँ शामिल हो सकती थीं जिन्हें राज्य सरकार चिह्न्ति करे जबकि राज्य सरकार ने वर्ष 1में इस आशय की जो अधिसूचना जारी की थी उसमें विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, डिग्री कॉलेजों के अलावा हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट के वही कॉलेज शामिल थे जिनमें स्वीकृत पदों के विरुद्ध शिक्षकों की भर्ती की गई हो।ड्ढr याचिका पर एडवोकेट एलपी मिश्रा की दलील थी कि राज्य सरकार ने स्वयं एक आदेश के तहत वित्त विहीन विद्यालयों में शिक्षकों के पदों की स्वीकृत किए जाने पर रोक लगा दी थी। परिणामस्वरूप ऐसे विद्यालयों के शिक्षक चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए थे। वकील ने इस सन्दर्भ में संविधान के अनुच्छेद 171 (3) (सी) तथा लोक प्रतिनिधि अधिनियम 10 की धारा 27 (3) (बी), तथा 27 (5) (बी) की भी व्याख्या की थी तथा ऐसे शिक्षकों के प्रति अपनाए गए रवैए को पक्षपातपूर्ण और अवैधानिक बताया था।

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