अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

‘आत्मा’ की गतिविधियां संतोषजनक नहीं

‘आत्मा’ की गतिविधियां संतोषजनक नहीं हैं। नतीजा यह है कि जिलों में कृषि विकास से जुड़ी योजनाआें की गति मंद पड़ गई है। कई सरकारी योजनाआें के क्रियान्वयन पर ही प्रश्नचिह्न् लग गया है। कृषि विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इस संस्था के कार्यों से नाराज विभाग के प्रधान सचिव एनएस माधवन ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कृषि योजनाआें के कार्यन्वयन में व्यक्ितगत रूप से रुचि लेने को कहा है।ड्ढr ड्ढr जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे खुद मॉनीटरिंग करें और ‘आत्मा’ को सशक्त बनाएं। बता दें कि जिलाधिकारी ही जिलों में कार्यरत ‘आत्मा’ के अध्यक्ष होते हैं। कृषि प्रबंध व्यवस्था के सबल बनाने के लिए समूहों के निर्माण से लेकर योजनाआें के क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी इसी संस्था की होती है।ड्ढr ड्ढr विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों में ‘आत्मा’ की प्रगति की प्रतिशतता दो अंकों तक भी नहीं पहुंच सकी है। योजनाआें के क्रियान्वयन के मामले में समस्तीपुर जिले में मात्र छह प्रतिशत प्रगति हो सकी है तो सीवान, गोपालगंज और शेखपुरा जिलों की प्रगति भी 10 प्रतिशत या उससे नीचे ही है। सर्वाधिक तेज गति से प्रगति करने वाले जिले पटना और कटिहार हैं। इन दोनों जिलों में प्रगति की प्रतिशतता क्रमश: 73 और 72 है। वैशाली, सहरसा, मुंगेर और पूर्णिया जिलों की प्रगति भी संतोषजनक है। इन जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक कार्य हुए हैं। शेष सभी जिलों में ‘आत्मा’ खस्ताहाल है। कुछ दिन पूर्व पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव ने भी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर ‘आत्मा’ की गतिविधियों में रुचि लेने की सलाह दी थी। उन्होंने पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों को ‘आत्मा’ की बैठकों में निश्चित रूप से भाग लेने का निर्देश दिया था।ड्ढr ड्ढr कृषि विज्ञान केन्द्रों व आत्मा में समन्वय स्थापित करने का निर्णयड्ढr पटना (हि. ब्यू.)। कृषि प्रसार तंत्र को और मजबूत करने के लिए सरकार ने ‘आत्मा’ और कृषि विज्ञान केन्द्रों में समन्वय स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए छह मार्च को एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। बमेती के निदेशक डा. आरके सोहाने ने बताया कि स्काडा सेंटर में आयोजित होने वाली कार्यशाला में ‘आत्मा’ के परियोजना निदेशक और कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारी भाग लेंगे। कृषि और पशुपालन विभागों के प्रधान सचिवों के अलावा अन्य वरीय अधिकारी उन्हें आपस में समन्वय स्थापित कर किसान हित में बेहतर कार्य करने के लिए उत्साहित करेंगे। श्री सोहाने ने बताया कि कई जिलों में ‘आत्मा’ और कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी अलग-अलग तरीके से कार्य करते हैं। इससे किसानों को परेशानी होती है और कृषि विकास के मिशन को गति देने में भी बाधा पहुंचती है। ‘आत्मा’ का गठन ही इसीलिए हुआ है कि वह सभी विभागों से समन्वय बनाकर किसानों को सिंगल विंडो सिस्टम से योजनाआें का लाभ पहुंचाये।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ‘आत्मा’ की गतिविधियां संतोषजनक नहीं