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शहीदों की याद से जुड़े स्मृति उपवन का नाम न बदलें

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह कानपुर रोड स्थित ‘स्मृति उपवन’ का नाम बदलने के मुद्दे पर फिर से विचार करे। पीठ ने कहा कि देश पर जान न्यौछवर करने वाले कारगिल अमर शहीद की याद में स्थापित इस उपवन का नाम बदलकर ‘कांशीराम स्मृति उपवन’ करने का फिलहाल कोई अवसर नहीं आया है।ड्ढr अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि ‘शहीद स्तम्भ’ सिर्फ एक एकड़ के क्षेत्र में है और सरकार उसे छेड़े बगैर बाकी के 100 एकड़ के क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण करना चाहती है। पीठ ने कहा कि यह पूरा क्षेत्र ही अमर शहीदों की स्मृति को समर्पित किया गया है। अत: ऐसी स्थिति में दोनों को अलग करके नहीं देखा जा सकता। शहीदों की याद को बनाए रखने के इरादे से ही यहाँ ‘भूगर्भ जल संरक्षण परियोजना’, ‘जल संरक्षण योजना’ चलाई गई। ‘नगरीय वन’ योजना के तहत यहाँ पेड़ लगाए गए।ड्ढr अशोक यादव देव की याचिका पर एडवोकेट आईपी सिंह की दलीलों को सुनने से पश्चात पारित आदेश में न्यायमूर्ति प्रदीपकान्त तथा न्यायमूर्ति श्री नारायण शुक्ला की खण्डपीठ ने कहा है कि ‘स्मृति उपवन’ यानी कि ‘स्वर्ण जयन्ती स्मृति उपवन’ अपने आप में सम्पूर्ण काम्पलेक्स है यह युद्ध में वीरगति को प्राप्त अमर जवानों की पहचान है। यहाँ ‘पेड़ लगाए’ जाने की गतिविधियाँ चलती हैं। अगर प्राधिकरण इस क्षेत्र को और अधिक विकसित करना चाहता है या सुन्दर बनाना चाहता है तो उसके लिए उसे ‘उपवन’ का नाम बदलने की जरूरत नहीं है। पीठ ने कहा है कि देश भक्तों, शहीदों के साथ आम आदमी की भावनाएँ जुड़ी हैं ये भावनाएँ सरकार को इसका नाम परिवर्तित करने की इजाजत नहीं देती। फिलहाल पीठ ने सरकार की ओर से एक सप्ताह का समय दिए जाने की प्रार्थना को मंजूर करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 17 मार्च की तारीख नियत की है।

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  • Web Title: शहीदों की याद से जुड़े स्मृति उपवन का नाम न बदलें