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जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा खतरे में

जलवायु परिवर्तन कई देशों की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएआे) ने चेतावनी दी है कि उच्च तापमान, सूखा, बाढ़ और मिट्टी की उर्वरता में कमी के कारण मध्यपूर्व के कई देशों में कृषि को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। एफएआे की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न भूख और कुपोषण जैसी समस्याआें का सबसे अधिक प्रभाव गरीबों, कुपोषितों और वैसे लोगों पर पड़ेगा, जो स्थानीय खाद्यान उत्पादन पर निर्भर हैं। मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के इलाके , खासतौर से पानी की कमी से जूझ रहे हैं। उत्तरी अफ्रीका में तापमान 37.4 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने के साथ, बढ़ते जल संकट से साढ़े पन्द्रह करोड़ से लेकर साठ करोड़ लोग और प्रभावित हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन पर कार्य करने वाले एफएआे के समूह के अध्यक्ष वुल्फ किलमान कहते हैं कि उक्त इलाके में शुष्क दिनों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के महाद्वीपीय इलाकों में गर्म हवाआें के बहने में तेजी आएगी और पाला वाले दिनों की संख्या घट जाएगी। नतीजतन, मौसम का अवधि घट जाएगी। किलीमान के मुताबिक, पानी और ऊर्जा के अधिक प्रभावी उपयोग, टिकाऊ खेती, बेहतर वन प्रबंधन और वनरोपण जैसे उपाय जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों को कम करने में सबसे अधिक प्रभावी कारक हैं। एफएआे का कहना है कि जलवायु में परिवर्तन सिर्फ वहां कृषि संसाधनों पर दबाव बढ़ाएगा जहां भूमि की उपलब्धता, उर्वरता में कमी, खाद्यान मूल्यों में वृद्धि और जनसंख्या वृद्धि जैसी समस्याएं पहले से मौजूद हैं। निकट पूर्व के कई देशों में बारिश के मिजाज में बदलाव से चावल जैसे खाद्यानों के उत्पादन प्रभावित होंगे।

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