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ठाकरे ने लांघी सारी सीमा

मराठी-गैरमराठी मुद्दे पर मनसे के सुर में सुर मिलाते हुए शिवसेना ने फिर बिहारियों पर हल्ला बोला है। इससे मराठी-गैरमराठी की भड़की आग को एक नयी हवा मिल गयी है। उत्तर भारतीयों को साथ लेकर चलने का दंभ भरने वाली शिवसेना ने बुधवार को अपनी पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में खासकर जदयू सांसद प्रभुनाथ सिंह, रेल मंत्री लालू यादव और राजद के सांसदों को लताड़ा है। अखबार ने लिखा है कि बिहार में भ्रष्टाचार की गंगा बहती है और इनकी वजह से गंगा मैली हो गयी है। बाल ठाकरे ही सामना के संपादक हैं और माना जाता है कि अखबार में जो कुछ छपता है, वह उनकी राय होती है। यही वजह है कि इस संपादकीय में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है उस पर भी आपत्ति है। एक बिहार सौ बीमार शीर्षक से लिखे संपादकीय में न सिर्फ गुस्सा जाहिर किया गया है बल्कि एक तरह से राज ठाकरे के कारनामे को सही ठहराने की कोशिश की गई है। शिवसेना को गुस्सा इस बात से है कि मनसे के समर्थकों ने जिस तरह से एक-दो टैक्सी वालों को क्या पीटा उसको लेकर बिहारी सांसदों ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया। शिवसेना के मुताबिक यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं था। ऐसे मुद्दों पर संसद में हंगामा करके हिन्दी भाषी सांसदों ने महाराष्ट्र की जनता को जमकर गालियां दी है। यह जिस थाली में खाया उसी थाली में थूकने जैसी बात है। जद यू नेता प्रभुनाथ सिंह को हत्यारा, आतंकी और लुटेरा सांसद करार देते हुए कहा गय है कि ऐसे नेताओं की वजह से बिहार में गंगा मैली हुई है। गंगा खून और भष्ट्राचार से मैली हुई है। अगर ऐसे नेता उनको संस्कृति का पाठ पढ़ाते हैं तो गलत है। ऐसे नेताओं ने ही बिहार को नरक बनाया है। वहां गरीबी, भूख, बेरोजगारी और जातिवाद के साथ अराजक स्थिति है।ड्ढr ठाकरे के इस अखबार ने यह भी लिखा है कि पूरे देश में बिहारियों के खिलाफ जो रोष है उसके लिए हिन्दी भाषी नेता ही दोषी हैं। असम में रोज बिहारी मजदूरों की हत्या हो रही है। बंगलुरू में बिहारी हटाओ शुरू है। दक्षिण के राज्यों में हिन्दी और हिन्दी भाषा की अजीब स्थिति है। इसके अलावा पंजाब और चंडीगढ़ में बिहारी जनता को रखने के लिए कोई तैयार नहीं है। इन सब बातों का जिक्र करते हुए अखबार ने आउटलुक में छपे लेख का भी उल्लेख किया है और पंजाब से चले एक एसएमएस का जिक्र किया है।ड्ढr अखबार ने बिहारी सांसदों को गोबर का कीड़ा कहा है और यह भी लिखा है कि उन्होंने पहले बिहार को गर्त में गिराया है और अब वे महाराष्ट्र की हालत बिहार जैसी करने वाले हैं। अखबार ने नसीहत के तौर पर लिखा है कि बिहारी के मुद्दे पर संसद में समय बर्बाद न करें बल्कि देश में कई मुद्दे हैं जिस पर चर्चा करनी चाहिए। शिवसेना ने धमकी के तौर पर कहा है कि महाराष्ट्र की जनता को जबाव देना आता है।ड्ढr इस बीच, लोकसभा के कुछ सदस्यों ने बुधवार को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। उधर, मुंबई पुलिस ने कहा है कि वह सामना में छपे लेख की जांच कर रही है और अगर उसमें कुछ आपत्तिजनक पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायोगी। सांसद प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि भारत का संविधान किसी को भी किसी का अपमान करने की इजाजत नहीं देता है। सांसद ने शिवसेना अध्यक्ष बाल ठाकरे को जेल में डालने की मांग भी की। जबकि रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि मुंबई पूरे देश का है। वह केवल मराठियों का नहीं है। बाल ठाकरे सठिया गये हैं, बिहारी मुंबई जाते रहेंगे और उन्हें कोई वहां से निकाल नहीं सकता है। लोकसभा के महासचिव को दी गयी नोटिस में कहा है कि तीन मार्च 2008 को लोकसभा में महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के साथ हो रहे र्दुव्‍यवहार तथा हिंसक हमले से उत्पन्न स्थिति की चर्चा हुई थी। वशेषाधिकार नोटिस पर हस्ताक्षर करनेवाले 18 सांसदों में देवेंद्र यादव, साधु यादव, प्रभुनाथ सिंह, विजयकृष्ण, रामेश्वर उरांव, इलियास आजमी, अखिलेश, सुरेंद्र गोयल और रामकृपाल यादव आदि प्रमुख हैं। उधर, बुधवार की सुबह सदन में प्रश्नकाल शुरू होते ही राजद के देवेंद्र प्रसाद यादव ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह संसद की गरिमा से जुड़ा मामला है। इस पर लोकसभाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि किसी भी संसद सदस्य पर किसी के द्वारा टिप्पणी अवमानना है और इस पर कार्रवाई की जायेगी। बाद में जनता दल यू के प्रभुनाथ सिंह और राजीव रंजन सिंह लल्लन ने भी यह मुद्दा उठाया।

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