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20 लाख के होम लोन पर घट सकती हैं ब्याज दर

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संकेत दिया कि 20 लाख रुपए से कम के आवास ऋण पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं, क्योंकि इस प्रकार के कर्ज पर जोखिम की दर मामूली रह गई है। वाणिय एवं उद्योग मंडल एसोसिएटिड चैंबर्स ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) प्रबंधन समिति के साथ बैठक मेंचिदंबरम ने कहा यदि उद्योग जगत उसे मिलने वाली कर रियायतों को लेना छोड़ देता है, तो सरकार कृषि क्षेत्र को और यादा सहायता दे सकती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (संप्रग) की सबसे बड़ी प्राथमिकता मुद्रास्फीति पर काबू करना है। सरकार महंगाई बढ़ने की दर को 4 प्रतिशत के आसपास रखना चाहती है। इसके साथ ही सरकार की मंशा निम्न मध्यम वर्ग के लिए 20 लाख रुपए तक के आवास ऋण पर ब्याज दरें कम रखने की है। उन्होंने कहा कि 20 लाख रुपए से अधिक के आवास ऋण की वसूली में डिफाल्टर यादा होते हैं, जबकि इससे कम के ऋण पर बहुत कम डिफाल्ट होता है। ऐसे में इस श्रेणी पर ब्याज दरें कम होनी चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि कृषि क्षेत्र को उसके आकार और उस पर निर्भर जनता के अनुरूप सरकार की तरफ से सहायता मिलनी चाहिए, लेकिन विडंबना यह है कि कोई भी दूसरा क्षेत्र अपना हिस्सा छोड़ने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि सभी कुछ सीमाआें के भीतर रहकर करना पड़ता है। उन्होंने किसानों की ऋण माफी के 60,000 करोड़ रुपए के पैकेज को उचित ठहराते हुए कहा कि भारतीय उद्योगों को इससे कहीं अधिक की रियायतें दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ञण माफी की पूरी राशि बैंकिंग तंत्र में सरकारी राजस्व से पूरी की जाएगी। वित्त मंत्री ने शेयर खरीद फरोख्त और लाभांश वितरण पर दोहरे कराधान को समाप्त करने की उद्योग जगत की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं, जिन्हें समान धरातल पर नहीं रखा जा सकता। श्री चिदंबरम ने अपने सभी बजट प्रस्तावों को पूरा समर्थन देते हुए कहा कि ये सभी कदम सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को प्रतिशत और आने वाले सालों में इसे और बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2008-0े उनके बजट में जिस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है वह है रायों को आवंटन। इस बार के बजट में रायों को कर, अनुदान और कर्ज में भारी वृद्धि की गई है। आने वाले वित्त वर्ष के लिए रायों का आवंटन कुल मिलाकर 3,06,000 करोड़ रुपए तक बढ़ा दियागया है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी वृद्धि है, पिछली सरकार के समय इस पर अंकुश लग गया था। मार्च में समाप्त हो रहे इस साल में भी रायों को करों, अनुदान और ऋण के रूप में केन्द्र की तरफ से 2,63,000 करोड़ रुपए तक प्राप्त होंगे। एसोचैम अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत, संगठन के निर्वाचित अध्यक्ष सजन जिंदल तथा उपाध्यक्ष डा. स्वातिपिरामल ने इससे पहले वित्त मंत्री के समक्ष उद्योगों को कई क्षेत्रों में राहत देने की मांग रखी थी। उन्होंने शेयरधारकों को लाभांश वितरण पर दोहरे कराधान से भी मुक्ित देने की मांग की थी।

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