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कच्चा तेल रिकार्ड छलांग के साथ 105 डॉलर के निकट

आेपेक के उत्पादन नहीं बढ़ाए जाने के फैसले और अमेरिका के स्टाक में भारी गिरावट की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतें पांच डॉलर की ऐतिहासिक उड़ान भरते हुए आज करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के नए शिखर को छू गईं। अमेरिका में कच्चा तेल वायदा कारोबार में 104.डॉलर प्रति डॉलर के नए रिकार्ड को बनाने के बाद 104.52 डॉलर पर पांच डॉलर प्रति बैरल ऊपर रहा। लंदन ब्रेंट क्रूड 4.12 डॉलर बढ़कर 101.64 डॉलर प्रति बैरल बोला गया। कच्चे तेल में ऐतिहासिक तेजी अमेरिका के तेल भंडार के आंकडों के बाद आई। अमेरिका ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकडों के मुताबिक पिछले सप्ताह कच्चे तेल का भंडार 31 लाख बैरल कम रहा है। हालांकि इस दौरान गैसोलीन का स्टाक 14 वर्ष का उच्चतम था। तेल उत्पादक निर्यातक देशों के संगठन (आेपेक) ने कल विएना में अपनी बैठक में उत्पादन नहीं बढ़ाए जाने का फैसला लिया था। आेपेक का मानना है कि कीमतों में बढ़ोत्तरी की जो वजह है, उसे नियंत्रण कर पाना उसके सामथ्र्य के बाहर हैं। आेपेक का मानना है कि ऊंची कीमतों के पीछे सट्टेबाजी, राजनीतिक अस्थिरता, कार्टेल का नियंत्रण और अमेरिका की गलत नीतियों का परिणाम है। आेपेक के अध्यक्ष चाकीब खलील ने कहा कि तेल बाजार में जो कुछ भी हो रहा है वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन का नतीजा है और इसका खामियाजा पूरे विश्व को भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव सैम बौडमेन ने कहा है कि कम स्टाक के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने आेपेक की बाजार से निपटने के तरीकों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ रही है। जानकारों का कहना है कि आेपेक द्वारा तेल का उत्पादन नहीं बढ़ाने के निर्णय से कच्चे तेल के कीमतों में इजाफा होगा।

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