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तेल कंपनियों ने की कर छूट जारी रखने की हिमायत

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने सरकार से कर छूट जारी रखने की हिमायत की है।इन कंपनियों ने कर अदा करने में मिली छूट जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा है कि इसे वापस लेने से कंपनियों के तेल खोज अभियान और उत्पादन संबंधी गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (आेएनजीसी) के मुख्य प्रबंध निदेशक आर एस शर्मा ने कहा है कि करों में छूट वापस लेने से कंपनियों पर नकारात्मक असर होगा। उन्हांेने कहा कि संसद में पेश किए गए बजट से पहले इस संबंध में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट पारित होने के बाद नए तेल शोधन कारखाने स्थापित करने का काम प्रभावित होगा। नए बजट में नए तेल कारखानों को कर में छूट नही मिलने की बात कही गई है। यदि प्रावधान ऐसे ही रहते हैं तो तेल शोधन कारखानों को स्थापना से पहले सात वषर्ों तक करों की अदायगी में छूट मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए गैस पर यादा ध्यान केंद्रित किया गया है लेकिन इसकी उत्पादन क्षमता आठ प्रतिशत है जबकि विश्व स्तर पर यह 40 प्रतिशत है। शर्मा ने कहा कि यदि करो में दी गई छूट वापस ले ली जाती है तो आेएनजीसी अपने विस्तार कार्यक्रमों की समीक्षा करेगी। उन्हांेने कहा-मैंने वित्तीय पहलुआें की पड़ताल करने को कहा है। हम अनिश्चितताआें के साथ नहीं चलना चाहते। आेएनजीसी की योजना राजस्थान और काकीनाडा में दो तेल शोधन कारखाने स्थापित करने की है। इसके अलावा, मंगलूर शोधन कारखाने की क्षमता तीन लाख बैरल प्रति दिन करने पर भी विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि करो की छूट वापस लेने से तीनों परियोजनाआें पर असर पड़ेगा।शर्मा ने कहा कि नए प्रावधानों से देश में तेल शोधन कारखानों के विस्तार पर असर पड़ेगा।

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