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दिल खोलकर बोली दिल्ली - वेलकम टीम इंडिया

भारतीय क्रिकेट में युवा खून के समर्थक कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने कुआलालंपुर में विश्व कप जीतने वाली अंडर-1टीम के खिलाड़ियों को उज्जवल भविष्य की आस बंधा कर खुश कर दिया। धोनी ने उन्हें सीनियर टीम की तरफ से बधाई देते हुए कहा ‘आपको भी देश के लिए खेलने का मौका मिलेगा।’ जिस समय धोनी यह कह रहे थे मंच पर दूसरी पंक्ित में बैठे भारतीय अंडर-1टीम के कप्तान दिल्ली के विराट कोहली और खब्बू तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान का चेहरा खिल उठा था। युवा क्रिकेटरों के लिए धोनी के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट बोड के अध्यक्ष शरद पवार की युवा खिलाड़ियों को मौका देने की नीति पर चलने की बात ने ‘सोने पर सुहागा’ वाली कहावत का चरितार्थ कर दिया। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष अरुण जेटली और उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना ने समारोह में दिल्ली के अंडर-1सितारों का जिक्र तक नहीं किया। हालांकि जेटली ने इस पर काफी खुशी जताते हुए कहा ‘यह साल फिरोजशाह कोटला स्टेडियम की 75वीं वर्षगांठ का है और ऐसे अवसर पर भारतीय टीम का अभिनंदन करने से बड़ा हर्ष का अवसर नहीं हो सकता। भारतीय टीम यहां आई यह डीडीसीए का सौभाग्य है।’ भारतीय टीम मेलबर्न से सुबह साढ़े ग्यारह बजे मुंबई पहुंची और वहां से विशेष विमान से ढाई बजे दिल्ली पहुंची। कुछ देर खिलाड़ियों ने होटल मंे आराम किया और फिर कोटला स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में खिलाड़ियों में सबसे पहले पौन चार बजे विराट कोहली और प्रदीप सांगवान पहुंचे थे। वे कल सुबह ही बेंगलुरु से दिल्ली पहुंच गए थे। साढ़े चार बजे जैसे ही भारतीय टीम कोटला पहुंची, इशांत ने विराट और प्रदीप को देखा और गर्मजोशी से हाथ मिला कर उनके साथ ही जाकर बैठ गए। विरेन्दर सहवाग ने भी दोनों से हाथ मिलाकर बधाई दी। हरभजन ने पवार से चेक लेकर हाथ मिलाया और साथ खड़े पंजाब क्रिकेट संघ के अध्यक्ष आई एस बिन्द्रा के पैर छुए। डीडीसीए ने अपने 20-20 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सितारों विरेन्दर सहवाग और गौतम गंभीर को तो पांच-पांच लाख रुपये के चेक दिए, लेकिन इस टीम के मैनेजर सुनील देव को सम्मानित नहीं किया। इससे वह नाराज थे। उन्होंने कहा ‘पता नहीं, ऐसा क्यों किया गया है।’ मंच पर राष्ट्रीय जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष संजीव शर्मा भी बैठे थे, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं पूछा। हालांकि टीवी के कैमरों में आने के लिए डीडीसीए के अधिकारियों में होड़ मची थी। जब खिलाड़ियों को 58-58 लाख रुपये देने की शुरुआत हुई तो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के तमाम अधिकारियों को मंच के आगे बुलाया गया, लेकिन वहां मौजूद उपराज्यपाल को नहीं बुलाया गया। सो वह उठकर चल दिए। हालांकि इससे पहले उनके हाथों से धोनी को एक स्मृति चिन्ह दिलवाया गया था। आयोजकों ने तिरंगे की व्यवस्था भी खूब की थी, लेकिन उन्हें तब निकाला गया जब समारोह खत्म हो गया था और खिलाड़ी लौट रहे थे।ड्ढr

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