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धोखे से निकलती बैंकों से मोटी रकम

बैंकों को धोखाधड़ी करने वाले तगड़ी चपत लगा रहे हैं। अगर बात पिछले वित्त साल की हो तो बैंकों को 1,078 करोड़ रुपये का झटका लगा। वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने भी इस बात को संसद में माना। इस दौरान धोखाधड़ी के 22 हजार से अधिक मामले सामने आए। बैंकिंग मामलों के एक्सपर्ट बताते हैं कि बैंकों को लाख उपाय करने के बाद भी चोट इसलिए पहुंचा दी जाती है क्योंकि कई बार चेक क्लीयर करने वाले अधिकारी काम के दबाव में बिना तसल्ली किए ही चेक को पास कर देते है। आमतौर पर वह उसी चेक को काफी गौर से देखता है और साइन मिलाता है जो बड़ी राशि के होते हैं। कुछ जानकार कहते हैं कि कभी-कभी खातेदार की चेकबुक खो जाती या उसके चेकों को कोई चुरा लेता है। उसके बाद खातेदार की तरह के साइन करके बैंक से पैसा निकाल लिया जाता है। जानकारों का कहना है कि प्राय: इस तरह से धोखाधड़ी करने वाले कम-कम राशि के चेक बैंक में जमा करवाकर पैसा निकाल लेते हैं। धोखाधड़ी के शिकार होने में सभी बैंक शामिल हैं। बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि साल 2006-07 के दौरान 178 मामले सामने आए जब बैंकों को जाली चेक या ड्राफ्ट देकर चपत लगाई गई। निजी और विदेशी बैंकों को इस अवधि के दौरान क्रमश: 62 और 57 मामलों में चोट पहुंची। हालांकि अगर बात नुकसान की हो तो उपयरुक्त सभी बैंकों को नुकसान तो मात्र 1335.06 लाख रुपये का ही हुआ, पर इस तरह के मामलों के होते रहने से बैंक भी चिंतित हैं। इंडियन बैंक के सीएमडी सुंदर राजन ने कहा कि उनके बैंक की सभी शाखाओं में कैमरे लगा दिए गए हैं। ये कैश बॉक्स और लॉकर के पास लगे होते हैं। इनका लाभ यह होता है कि बैंक से गड़बड़ करने देर तक बचा नहीं रहता। जानकारों का कहना है कि इसके अलावा बैंकों से काफी बड़ी रकम निकल जाती है डकैती की घटनाओं में। सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बाद भी बैंकों में डकैती की घटनाएं जारी हैं। नक्सल प्रभावित सूबों में बैंकों को डकैती की घटनाएं निरंतर जारी हैं। इस कारण से भी बैंकों का करोड़ों निकल जाता है। सुरक्षा मामलों के जानकार यह भी कहते हैं कि बैंकों धोखाधड़ी करने वाले इसलिए भी सफल हो जाते हैं क्योंकि उनकी कई बार बैंक के ही कर्मियों से मिलीभगत होती हैं।

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  • Web Title: धोखे से निकलती बैंकों से मोटी रकम