DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मौलाना मदनी और मौलाना उस्मान ने बनाए अलग गुट

भारतीय मुसलमानों का नब्बे साल पुराना मजहबी एवं सामाजिक संगठन ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ गुरुवार को दो फाड़ हो गया। गुरुवार को जब संगठन की कार्य समिति की दिल्ली स्थित दफ्तर में बैठक हुई तो दिवंगत मौलाना असद मदनी के बेटे मौलाना महमूद मदनी समर्थक आठ सदस्यों ने अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। इस पर मौलाना अरशद मदनी अपने पाँच समर्थकों-मौलाना अब्दुल रशीद, मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी, मौलाना हाफिज मोहम्मद सिद्दीक, मोहम्मद हनीफ दादना कुमार एवं हुसैन अहमद कादरी के साथ बैठक से चले गए।ड्ढr बाद में बैठक में मौजूद सदस्यों ने दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम कारी मोहम्मद उस्मान को जमीयत उलमा-ए-हिंद का कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत कर दिया। 28 मार्च को जमीयत की आम सभा का इजलास बुलाया गया है, जिसमें नए अध्यक्ष के रूप में कारी उस्मान के मनोनयन पर मुहर लगाने का काम किया जाएगा।ड्ढr उधर, मौलाना अरशद मदनी ने कार्य समिति का पुनर्गठन किया। नई समिति में उन्होंने अपने भतीजे एवं राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी और उनके समर्थक आठ सदस्यों मौलाना बदरुद्दीन अजमल, सैयद शकील अहमद, मौलाना अबूबक्र (गाजीपुर), मौलाना सिद्दीकुल्ला चौधरी, हाफिज पीर शब्बीर(असम), मौलाना मोहम्मद इकबाल एवं मौलाना अजहर (बिहार) को जगह नहीं दी।ड्ढr मौलाना अरशद मदनी दारुल उलम देवबंद के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष हैं। वह मौलाना असद मदनी के छोटे भाई हैं और वह मौलाना असद मदनी के 6 फरवरी, 2006 को निधन हो जाने के बाद मार्च 2006 में महमूद मदनी को पराजित कर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष चुने गए थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मौलाना मदनी और मौलाना उस्मान ने बनाए अलग गुट