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कार्मिक विभाग में ही सेवा नियमों का पालन नही

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की वरीयता सूची में अनियमितता की बात सामने आयी है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी अधिकारियों की इस सूची के आधार पर संयुक्त सचिव की श्रेणी में दी गयी प्रोन्नति पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने इसकी शिकायत कार्मिक सचिव से की है। सेवा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराना इस विभाग का दायित्व है। लेकिन विभाग ने वरीयता को लेकर जो आधार बनाया है, वह सेवा नियमों के विपरीत है।ड्ढr प्रोन्नति के बाद योगदान की तिथि को आधार बना कर पुन: वरीयता का निर्धारण किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि वरीयता सूची निर्गत कर एक सप्ताह के भीतर आपत्ति की मांग की गयी। सूची तत्क्षण जारी नहीं हुई। समय सीमा बीत जाने के बाद इसे विभागों एवं अधिकारियों के पास भेजा गया। पत्र पहुंचने के बाद जब लोगों को जानकारी हुई, तो समय सीमा के बाद संबंधित अधिकारियों ने आपत्ति देना शुरू किया है। पिछली बैच में आगे रहने वाले करीब चार दर्जन अधिकारी काफी नीचे हो गये हैं। भविष्य में मिलने वाली प्रोन्नति में भी वे शामिल नहीं हो सकेंगे। अभी ही कनीय अधिकारी संयुक्त सचिव बन गये हैं। जबकि वरीय अधिकारी उप-सचिव ही है। चर्चा है कि कई अधिकारी प्रोन्नति पाकर वैसे पद पर काम करने लगे हैं, जहां वह स्वीकृत ही नहीं है।

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