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तो भीष्म पितामह ने साध लिया है मौन

वेच्छा से विश्राम कर रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से आत्मा की आवाज सुनने का आह्वान कर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें ‘राजनीतिक तंद्रा’ से जगा दिया। नजदीकी सूत्रों के अनुसार वाजपेयी ने मनमोहन सिंह के संसद में बुधवार को दिए बयान को टेलीविजन पर उत्सुकता से देखा और मंद-मंद मुस्कराए भी। उनके स्टाफ ने एजेंसी के समाचार उनके सामने बढ़ाए और वह गहन सोच के साथ उन खबरों को पढ़ते रहे। प्रधानमंत्री ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से हुई चर्चा का जवाब देते हुए वाजपेयी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह कहा था और उनसे संकीर्ण दलगत राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर परमाणु करार पर अंतरात्मा की आवाज सुनने का आग्रह किया था। समझा जाता है कि डॉ. सिंह की इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताआें ने सरकार को करारा जवाब देने के लिए वाजपेयी की तरफ से करार के खिलाफ बयान जारी कराने की कोशिशें शुरू कर दी हैं लेकिन भीष्म पितामह ने मौन साध लिया है। वाजपेयी के निवास से सम्पर्क किए जाने पर बताया गया कि इस बयान पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं जारी की जा रही है। सूत्र ने कहा कि डॉ. सिंह ने वाजपेयी को राजनीति का भीष्म पितामह कह कर तीन मकसद एक साथ साधने की कोशिश की है। पहला और बड़ा राजनीतिक मकसद यह हो सकता है कि आडवाणी को वाजपेयी के सामने बौना साबित किया जाए। दूसरा, परमाणु करार के लिए वाजपेयी का मौन समर्थन हासिल करना और तीसरा एवं अपेक्षाकृत छोटा मकसद भारत रत्न न देने के निर्णय को सही साबित करना ताकि वाजपेयी को यह संदेश जाए कि आडवाणी उन्हें भारत रत्न तक सीमित करना चाहते हैं, जबकि सरकार उन्हें भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह मानती है।

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