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अब शिक्षकों पर धन वर्षा की बारी

उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों का पलायन रोकने के लिए सरकार नायाब प्रयोग करने जा रही है। सरकार उन्हें आकर्षक वेतन देगी । रिसर्च की सुविधायें देगी । जीवन साथी को रोजगार में प्राथमिकता देगी। बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला और क्लब व अन्य सुविधायें उपलब्ध करायेगी। विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, आईआईएम और आईआईटी सरीखे हाई प्रोफाइल शैक्षिक केंद्रों में शिक्षकों की भारी कमी का संकट है। शिक्षकों के अस्सी हजार से अधिक पद खाली हैं। शिक्षण व्यवस्था चरमरा सी गई है। आकर्षक वेतन और सुविधाओं की खातिर अनेक लब्ध प्रतिष्ठित शिक्षक या तो निजी संस्थानों में चले गए हैं या फिर विदेश पलायन कर चुके हैं। खाली पद भरने के लिए यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल बेअसर साबित हुई है। लिहाजा पलायन कर विदेश चले गए एक्सेलंट शिक्षकों की वापसी के लिए वैज्ञानिक रामानुजम फेलोशिप के तौर पर उन्हें पचास हजार रुपये अतिरिक्त वेतन मिलेंगे। साथ ही रिसर्च मद में पांच साल तक पांच लाख रुपये सालाना दिये जायेंगे। देश में कार्यरत्त लब्ध प्रतिष्ठित शिक्षकों को वैज्ञानिक जे.सी.बोस फेलोशिप के तहत पांच वर्षो तक सालाना पांच लाख रुपये के अलावा उन्हें अतिरिक्त वेतन के तौर पर 20 हजार रुपये और कंप्यूटर व इंटरनेट की सुविधा दी जायेगी। देश में चार सौ से अधिक विश्वविद्यालयों और 18,000 कालेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षकों को ठेके पर भी रखे जाने की योजना है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव आर.पी.अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि शैक्षिक गुणवत्ता सुनिश्चत करने के लिए देश भर के पचास हजार पीएचडी और एम.टेक शिक्षकों को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग दी जायेगी ताकि वे अपने ज्ञान को आगे बढ़ा सकें। देश भर के सभी विश्वविद्यालयों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ा जायेगा और यूजीसी द्वरा संचालित 50 स्टाफ एकादमी कालेजों को नये सिरे से पुनर्जीवित किया जायेगा। दुनिया की बेहतर शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए 250 शिक्षण संस्थानों में वीडियो शिक्षण की व्यवस्थाकी जायेगी।ं

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