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रेटिंग में दूरदर्शन के पिटने से सरकार नाराज

चैनलों की हफ्तेवार रेटिंग में दूरदर्शन के चैनलों का नामोनिशान नहीं होना अंतत: इस रेटिंग को नापने वाली एजेंसी टैम (विदेशी कंपनी एसी नील्सन की कंपनी) को भारी पड़ रहा है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय की हाल की एक बैठक में टैम के प्रतिनिधि बुलाए गए और अधिकारियों ने उनकी इसी मुद्दे पर जमकर खिंचाई की। मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी भी टीवी रेटिंग की मौजूदा व्यवस्था पर एतराज जता चुके हैं। सरकार की इसी सोच का नतीजा है कि ट्राई (यह टेलीकॉम क्षेत्र के अलावा प्रसारण क्षेत्र के लिए भी रेगुलेटर का काम करती है) भी रेटिंग व्यवस्था पर एक कंसल्टेशन नोट (सलाहकारी परिपत्र) जारी करने वाला है जिसके तहत इस व्यवस्था के सुधार के लिए संबंधित पक्षों से राय मांगी जाएगी। हाल ही में ट्राई ने करीब 240 चैनलों की प्रतिनिधि संस्था आईबीएफ (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फांउडेशन), विज्ञापनदाताओं और अन्य संबंधित पक्षों के साथ एक बैठक की, जिसमें आईबीएफ ने टैम के सामने रेटिंग की अपनी नई एजेंसी खड़ी करने का इरादा साफ किया। आईबीएफ के डायरेक्टर फाइनेंस नरेश चहल ‘हिन्दुस्तान’ से कहते हैं, ‘ हमारा इरादा टैम से प्रतिस्पर्धा करने का नहीं है। यह हमारी इंडस्ट्री का सम्मलित प्रयास है जिसका इरादा चैनलों की सही रेटिंग सामने लाना है। हमारी संस्था लाभ कमाने के लिए नहीं होगी।’ टैम रेटिंग की सबसे बड़ी आलोचना इस बात को लेकर होती रही है कि इसका सैंपल साइज बहुत छोटा है और यह केवल करीब 6500 घरों में पीपल मीटर (सेट टॉप बॉक्स) लगाकर देश के 100 करोड़ लोगों की पसंद-नापसंद का निर्धारण करता है। रेटिंग की नई व्यवस्था लाने के पीछे आईबीएफ, विज्ञापनदाताओं की एजेंसी एएएआई और एएसआई है। चहल कहते हैं कि नई एजेंसी की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि चैनलों के कार्यक्रमों की रेटिंग इंडस्ट्री को हर हफ्ते की बजाय हर दिन उपलब्ध होगी।

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