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आवास ऋण सस्ता होगा : वित्त मंत्री

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संकेत दिये हैं कि 20 लाख रुपए से कम के आवास ऋण पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कर्ज पर जोखिम की दर मामूली रह गई है। इसलिए सरकार की मंशा निम्न मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए 20 लाख रुपए तक के आवास ऋण पर ब्याज दरें कम रखने की है। उन्होंने कहा कि 20 लाख रुपए से अधिक के आवास ऋण की वसूली में डिफाल्टर यादा होते हैं जबकि इससे कम के ऋण पर यह संख्या काफी कम होती है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश की जनता भी ऐसा ही कुछ चाहती है। हालांकि वित्त मंत्री का कहना है कि अगर बैंक चाहेंगे तभी ऐसा संभव हो सकेगा। गुरुवार को औद्योगिक निकाय एसोचैम प्रबंधन समिति के साथ बैठक में चिदम्बरम ने ये बातें कहीं।ड्ढr ड्ढr वित्त मंत्री ने कहा कि अब सरकार इस बारे में भी अपने प्रयास तेज करेगी कि किसानों की ऋणमाफी का मसला कैसे हल किया जाए, जिससे बैंक की क्षमता पर असर न पड़े। उन्होंने कहा कि इसके लिए आरबीआई के साथ मिलकर ऋण माफी और ऋण राहत योजना पर काम किया जाएगा तथा सरकार पैकेज के रूप में ऋण माफी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। एसोचैम प्रबंधन समिति के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि यदि उद्योग जगत कर रियायतों को लेना छोड़ देता है तो सरकार कृषि क्षेत्र को और यादा मदद दे सकती है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता मुद्रास्फीति पर काबू पाना है। सरकार महंगाई बढ़ने की दर को चार फीसदी के आसपास रखना चाहती है। किसानों की ऋण माफी के 60000 करोड़ रुपए के पैकेज को उचित ठहराते हुए कहा कि भारतीय उद्योगों को इससे कहीं अधिक की रियायतें दी जा रही हैं। वित्त मंत्री ने शेयर खरीद-फरोख्त और लाभांश वितरण पर दोहरे कराधान को समाप्त करने की उद्योग जगत की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों अलग अलग मुद्दे हैं जिन्हें समान धरातल पर नहीं रखा जा सकता।ड्ढr ड्ढr चिदंबरम ने अपने सभी बजट प्रस्तावों को पूरा समर्थन देते हुए कहा कि ये सभी कदम सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को प्रतिशत और आने वाले सालों में इसे और बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2008-0े उनके बजट में जिस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है वह है रायों को आवंटन। इस बार के बजट में रायों को कर, अनुदान और कर्ज में भारी वृद्धि की गई है। आने वाले वित्त वर्ष के लिए रायों का आवंटन कुल मिलाकर 306000 करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया है। चिदंबरम ने पूर्ववर्ती राजग सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के छह साल में जीडीपी की औसत वृद्धि दर 5.प्रतिशत रही जबकि संप्रग सरकार के कार्यकाल में यह 8.8 प्रतिशत तक बढ़ गई।

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