DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बजट में बड़ों को रियायतें, बच्चे हुए उपेक्षित

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा तैयार किए गए साल 2008-0े बजट में बड़ों को तो खूब रियायतें दी गईं लेकिन देश के चार करोड़ 20 लाख से ज्यादा बच्चे बहुत हद तक उपेक्षा का शिकार हो गए। ‘हक : सेंटर फॉर चाईल्ड राईट्स’ नामक गैर सरकारी संगठन द्वारा अगले वित्त वर्ष के बजट का बच्चों की जरूरतों के नजरिए से किया गया विश्लेषण जाहिर करता है कि बाल कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए सरकार ने संसाधनों में भारी कटौती कर दी है। संगठन द्वारा बाल कल्याण की दृष्टि से इस बजट का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर देश सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक ‘‘पल्स पोलियो’’ के लिए चालू वित्त वर्ष में रखे गएकरीबन 1300 करोड़ रुपये के मुकाबले 2008-0े लिए केवल 1042 करोड़ रुपये रखे गए हैं। दिलचस्प बात है कि बजट पूर्व पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण रपट में सरकार ने स्वयं यह माना है कि सन 2006 में देश भर में पोलियो फिर से पैर पसारने की शुरुआत कर रहा था और 31 दिसंबर 2007 तक देश भर में पोलियो के 471 मामले सामने आ चुके थे। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बजट में सरकार द्वारा किए प्रावधान अपेक्षा से कम रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित योजनाओं के लिए आवंटित राशि कुल बजट का 0.268 फीसदी थी। अगले वित्त वर्ष के लिए यह अनुपात गिरकर 0.244 फीसदी रह गया है। बजट में बाल कल्याण की दृष्टि से देश केसबसे प्रमुख कार्यक्रम समेकित बाल विकास योजना(आईसीडीएस) को आवंटित राशि में अगले साल के लिए 04.2 करोड़ रुपये की वृद्धि तो की गई है पर इसमें से 838.80 करोड़ रुपये आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बढ़े हुए वेतन के रूप में चले जाएंगे। इस तरह बच्चों के इस्तेमाल के लिए इस राशि में मात्र 65.4 करोड़ रुपये की वृद्धि ही हो पाएगी। यही नहीं अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार ने इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है जबकि चालू वित्त वर्ष में इसी मद मंे 78 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। कामगारों के बच्चों के पालन पोषण के लिए चलाई जा रही ‘‘राजीव गांधी क्रेच योजना ’’ को आवंटित राशि में 6.7 प्रतिशत की कमी कर दी गई है। इस बजट में सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए चलाई जा रही समेकित बाल सुरक्षा परियोजना (आईसीपीएस) को 85.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 180 करोड़ रुपये तो कर दिया है पर यह अभी भी बजट का मात्र 0.056 फीसदी है। गौरतलब है कि महिला और बाल कल्याण मंत्रालय ने इस पंचवर्षीय योजना के लिए 3000 करोड़ रुपये की मांग की थी। पहले योजना आयोग ने कैंची चलाकर इसे 1000 करोड़ रुपये कर दिया था। इसके अलावा इस साल इस किशोर अपराधियों की न्यायिक व्यवस्था को भी उपेक्षित छोड़ दिया गया है। ‘हक : सेंटर फॉर चाईल्ड राईट्स’ के विश्लेषण में कहा गया है कि सर्व शिक्षा अभियान और स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध करवाने हेतु धन उगाहने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए उपकर से एकत्रित राशि में 23.3 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि इन दोनों मदों में आवंटित राशि में केवल 6.3 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बजट में बड़ों को रियायतें, बच्चे हुए उपेक्षित