अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत जोड़ो या भारत तोड़ो

महाराष्ट्रवासी थे बाबा आमटे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी कुष्ठ रोगियों की सेवा में लगा दी। उन्हें उम्मीद जगाई कि वह जिंदगी को खुशी से जी सकते हैं। इसीलिए अपने आश्रम का नाम दिया आनंदवन। वह एक तरह से कुष्ठ रोगियों की ही बस्ती थी। बाबा ने नारा दिया था भारत जोड़ो। कुछ दिनों पहले ही वह चल बसे। लेकिन उनका संदेश हमेशा हमारे बीच रहेगा। फिलहाल तीन महाराष्ट्रवासी हमारे बीच में हैं। यानी बाल ठाकरे, उनके बेटे उद्धव और भतीजे राज। इन लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी गैर महाराष्ट्रीय लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने में लगा दी। वे उन लोगों को महाराष्ट्र से भगाने में लग गए। हजारों लोगों को महाराष्ट्र छोड़ कर भागना पड़ा। अपना कारोबार छोड़ना पड़ा। जाहिर है उनका नारा है- भारत तोड़ो। ये भी हिन्दुस्तानी हैं। मुझे उम्मीद है कि उनका संदेश हमेशा हमारे बीच नहीं रहेगा। उनके दुनिया छोड़ने से पहले ही मर जाएगा। एक गुजराती थे मोहनदास करमचंद गांधी। उन्होंने अपनी जिंदगी हिन्दुस्तानियांे को यह सिखाने में लगाई कि वे सब एक हैं। वह जिंदगीभर मुसलमानों को भरोसा दिलाते रहे कि उनके साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने मुसलमानांे और हिन्दुओं को बताया कि वे भारत माता की संतान हैं। यह अलग बात है कि जिस शख्स ने उनकी हत्या की वह भी हिन्दुस्तानी ही था। एक और गुजराती हैं नरेंद्र मोदी। वह गुजरात के कामयाब मुख्यमंत्री हैं। वह गांधीजी की सोच से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि मुसलमान गड़बड़ियां फैलाते हैं। उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिए। सो, गुजरात में जबर्दस्त दंगे हुए। उसमें हजारों बेगुनाह मुसलमानों को जान से हाथ धोना पड़ा। काफी लोगों को गुजरात छोड़ना पड़ा। जो रह भी गए उन्हें अपनी जान का डर बना रहा। एक गुजराती और हैं तीसता सेतलवाड़। वह जुझारू औरत हैं। वह पीड़ित मुसलमानों के मामले उठाती रही हैं। उनकी खुद की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। उसकी परवाह उन्होंने कभी नहीं की। वह गांधीजी को मानती हैं। मोदी को नहीं। आंध्र प्रदेश की एक लड़की हैं सानिया मिर्जा। वह खूबसूरत हैं। कमाल की टेनिस खेलती हैं। एशिया में नंबर वन हैं। वह मुसलमान है। कुछ हिन्दुस्तानी मुसलमानों को दिक्कत है कि वह टेनिस खिलाड़ियों की ड्रेस क्यों पहनती हैं? स्कर्ट तक से वे भड़क उठते हैं। उन्होंने सानिया के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। वह अब अपने देश में ही टेनिस नहीं खेलना चाहतीं। एक हिन्दुस्तानी हैं, मकबूल फिदा हुसैन। वह मध्य प्रदेश के इंदौर से हैं। वह हिन्दुस्तान के सबसे बड़े पेंटर हैं। उनकी एक पेंटिंग तो चार करोड़ में बिकी थी। लेकिन चाहने के बावजूद वह हिन्दुस्तान में नहीं रह रहे हैं। उन्हें दुबई मंे रहना पड़ रहा है। दरअसल, अपने ही देश के कुछ लोगों ने उन पर मुकदमा ठोंक रखा है। इस बिना पर कि उनकी पेंटिंग से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। वे हुसैन साहब की गिरफ्तारी चाहते हैं। अपना काम शांति से करने के लिए उन्हें बाहर रहना पड़ रहा है। वह अपनी दिक्कतों को गालिब के बहाने बताते हैं-ड्ढr या रब! वो न समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात।ड्ढr दे और दिल उनको, जो न दे मुझको जुबां और॥ड्ढr अपने ही हिन्दुस्तानी लोगों को हम किस तरह परेशान कर सकते हैं, उसकी एक मिसाल हाल ही में मिली। बीजेपी का छात्र संगठन है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी। ये लोग दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर के ऑफिस में जबर्दस्ती घुस गए। वहां उनके साथ बद्तमीजी की। उनका फर्नीचर तोड़ डाला। उनके गुस्से की वजह थी एमए में इतिहास का सिलेबस। उसमें रामानुजन का एक लेख पढ़ाया जा रहा था। वह लेख रामायण के अलग-अलग संस्करणांे पर था। उनका मानना था कि उस लेख से श्रीराम का अपमान हुआ है। उनके अलावा और किसी को कुछ भी गलत नहीं लगा। अगर कोई मुद्दा भी था, तो उस पर बात हो सकती थी। बहस-मुबाहिसा हो सकता था। लेकिन वह तो अपनी बात मारधाड़ से कहना चाहते थे। उन लोगों ने उसमें उपिंदर कौर का नाम भी जोड़ दिया। वह इतिहास की प्रोफेसर और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी हैं। यों उनका इस मामले से कुछ भी लेना-देना नहीं है। यह मसला पूरी तरह से बेईमानी और बद्तमीजी का है। अजीब बात है कि बीजेपी के किसी भी नेता ने इस गुंडागर्दी के लिए एक लफ्ज तक नहीं कहा। न लालकृष्ण आडवाणी ने और न राजनाथ सिंह या विजय कुमार मल्होत्रा ने। क्या यह भारत जोड़ो है या भारत तोड़ो?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: भारत जोड़ो या भारत तोड़ो