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विकास की धारा तो शासन ने ही रोक ली

राज्य सरकार स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना का 157 करोड़ रुपया पिछले तीन वर्षो से खर्च कर नहीं सकी है।ड्ढr ग्राम्य विकास विभाग के एक नौकरशाह ने एक ऐसा ही आदेश जारी कर विकास योजना की धारा को मुहाने पर ही रोक दिया। सूत्रों के मुताबिक इस आईएएस ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरणों से स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत संस्थाओं के अवस्थापना सुविधा सम्बंधी प्रस्तावों को स्वीकृति देने का अधिकार छीन कर शासन में अपने अधीन कर लिया। इसके चलते संस्थाओं के प्रस्तावों को स्वीकृत मिलने में तमाम दिक्कतें आने लगीं। नतीजतन प्रस्ताव शासन की फाइलों में धूल खाते रहे। वर्ष 2005-2006 में अवस्थापना मद के 48 करोड़ में से मात्र 15 करोड़ रुपए खर्च हुए। 2006-2007 में मद के 52 करोड़ रुपए में से केवल 10 करोड़ खर्च हुए। चालू वित्तीय वर्ष में भी शासन अब तक मात्र 10 करोड़ खर्च कर सका है। जबकि इस मद में 82 करोड़ रुपए स्वीकृत हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों भारत सरकार की नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती शासन में प्रस्तावों की स्वीकृति के सम्बंध में किए गए शासनादेश में संशोधन कर नए आदेश जारी कर दिए। इसके तहत शासन से ही सभी प्रस्तावों को स्वीकृति देने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। ताजा शासनादेश के अनुसार 25 लाख तक के प्रस्ताव पर स्वीकृति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति देगी। मण्डल स्तर पर 50 लाख रुपए के प्रस्ताव मण्डलायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति तथा 50 लाख से अधिक और 1 करोड़ तक के प्रस्तावों को राज्य मुख्यालय स्तर पर ग्राम्य विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति स्वीकृति देगी। 1 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रस्तावों को विशेष परियोजना प्रस्ताव के रूप में शासन के पास भेजा जाएगा। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास रोहित नन्दन ने संशोधित आदेश की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मकसद विगत 2005 से रुके धन से ज्यादा से ज्यादा संस्थाओं को लाभान्वित कराना है।ं

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