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यूपी को देखकर लगता है आ गए चुनाव

लोकसभा चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन चुनावी अखाड़ा सजने लगा है। पूरे प्रदेश में शह और मात का खेल शुरू हो गया है। लोकार्पण व शिलान्यासों की धूम है। परिसीमन के बाद जिन नेताओं के अपने क्षेत्र बदल गए हैं, वे पुराने को भूल नए क्षेत्रों पर ध्यान लगाए हुए हैं। इस चुनाव पूर्व तैयारी में ही प्रत्याशियों का करोड़ों रुपया पानी की तरह बह रहा है। गठबंधन की संभावना तलाशी जा रही है। एक बार फिर सपा और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के बीच चुनावी गठबंधन का ताना-बाना बुना जा रहा है।ड्ढr राजधानी लखनऊ को देखकर तो लग रहा है कि लोकसभा चुनाव सिर पर आ गए हैं। कमोबेश यही स्थिति पूरे प्रदेश की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निर्वाचन क्षेत्र में कई प्रत्याशी पहले से ही ताल ठोककर उतर गए हैं। शुक्रवार सुबह पत्रकारों को पता चला कि नगर विकास मंत्री नकुल दुबे नगर की 1परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। यह योजना अकस्मात तैयार हुई। नकुल दुबे ही क्यों, केन्द्रीय इस्पात मंत्री अखिलेश दास के होर्डिग व बैनरों से नगर पटा पड़ा है। मेयर डॉ. दिनेश शर्मा दिन भर एक से दो दर्जन तक कार्यक्रम कर रहे हैं। मेरठ में मलूक नागर को बसपा के प्रत्याशी के रूप में फिलहाल हरी झण्डी मिल चुकी है। पूरा शहर उनकी होर्डिग से पटा पड़ा है। सूत्रों के अनुसार सपा और रालोद के बीच चुनावी गठबंधन की बातचीत चल रही है। पिछले दिनों मुलायम सिंह यादव जब आगरा गए थे तो वहाँ जेल में बंद रालोद नेता स्वामी ओमवेश से मिलने गए। यदि यह गठबंधन अंतिम रूप लेता है तो पिछले लोकसभा चुनाव की तरह ही रालोद के पाले में पश्चिमी यूपी की दस सीटें जा सकती हैं। आगरा के वर्तमान सांसद राजबब्बर की सीट अब सुरक्षित हो गई है। वह अब फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ सकते हैं। इसलिए अब श्री बब्बर देहात के क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। नई सीट के लोग श्री बब्बर से मिलने के लिए ताँता लगाए रहते हैं। भाजपा के अरिदमन सिंह भी अभी से फतेहपुर सीकरी क्षेत्र मथ रहे हैं। वाराणसी में बहुत ही रोचक परिदृश्य है। यह सीट कांग्रेस के कब्जे में है। पिछले कई चुनावों से यह भाजपा का गढ़ था, लेकिन पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट छीन ली। अब भाजपा के अंदर ही कई बड़े नेता इस सीट के दावेदार हैं। कलराज मिश्र ने अपनी सांसद निधि का पूरा पैसा यहाँ लगा दिया है। उधर, गाजीपुर के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा अब वाराणसी में ही रह रहे हैं। वह गाजीपुर से चुनाव लड़ना नहीं चाहते। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के यहाँ अब बुलंदशहर के बजाय एटा के लोगों की भीड़ ज्यादा जुट रही है। गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ अपने चेलों को चुनाव लड़वाने के लिए लगातार दौरा कर रहे हैं। योगी अभी से पूर्वाचल की करीब छह सीटों पर अपना जनाधार बढ़ाने में लगे हैं।ं

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