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६० रुपए किलो खोया,नहीं..ये तो कुछ और ही है

खोया..वह भी साठ रुपए किलो। यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन यह सही है। चारबाग, रकाबगंज व ऐशबाग (नई) की मंडी में इस भाव में भी खोया मिल रहा है। वास्तव में यह खोया नहीं कुछ और ही है। यह है सिंथेटिक (नकली खोया) खोया। इन मंडियों में नकली के अलावा मिलावटी खोया भी खूब बिक रहा है। होली नजदीक है सो खोया मंडी चरम पर है। राजधानी में हर दिन पाँच से सात टन खोए का कारोबार हो रहा है। इनमें ज्यादातर आढ़तिए व दुकानदार वही हैं जिनके यहाँ खोया मिलावटी पाया गया था। नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग के खाद्य निरीक्षकों का ध्यान अभी इस ओर नहीं गया है।ड्ढr मंडिया भोर से ही आबाद हो रही हैं। आढ़तियों के अलावा गाँवों से लोग डलियों में खोया भरकर लाते हैं। इन दिनों ऐशबाग वाटर वक्र्स के पहले एक नई खोया मंडी खुल गई है। इसमें उन्हीं लोगों का वर्चस्व है, जिन्हें बीते साल अगस्त में डीएम ने सिंथेटिक खोया बनाते पकड़ा था। इन पर गैंगस्टर लगा था और जेल गए थे। राजधानी में कानपुर से खूब खोया आ रहा है। इसमें कानपुर घंटाघर के उस व्यापारी के यहाँ का खोया है जिसका पूरे राज्य में नकली खोया बनाने में कोई सानी नहीं है। मिलावटी दुग्ध सामग्री के लिए कुख्यात मेरठ, बुलंदशहर और खुर्जा से भी खोया आ रहा है। कानपुर का खोया 200 रुपए पसेरी तक का है। यानी 40 रुपए प्रति किलोग्राम से भी कम। डेयरी उद्योग से जुड़े एक व्यापारी बताते हैं कि एक लीटर शुद्ध दूध में 250 ग्राम खोया बनता है और एक किलो खोया चार लीटर दूध से बनेगा। शहर में अच्छा दूध 20 से 22 रुपए लीटर है। एक किलो खोये की कीमत ही इस समय 110 प्रति किलो बैठ रही है। ऐसे में इससे सस्ता जो भी खोया बिकेगा वह नकली है या फिर मिलावटी होगा।ड्ढr ऐसे बन रहा है नकली खोयाड्ढr घटिया पाउडर का दूध, ग्लूकोज सीरप, घटिया रिफाइंड, फ्लेवर व रसायन। इसे बड़े कड़ाह में डालकर भट्टी पर चढ़ाकर खूब मिलाते हैं। ठंडा होने पर इसकी ढेरियाँ बनाई जाती हैं। गाँवों में आधा हिस्सा खोया और बाकी आलू व शकरकंद होता है।

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