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पति हैं कई महिला प्रत्याशियों की पहचान

झारखंड राज्य में पहली बार हो रहे स्थानीय निकाय के चुनाव में कई रोचक तथ्य सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार ने रांची नगर निगम के चुनाव में मेयर का पद अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया है। अब चुनाव में कई ऐसी महिलाएं भी भाग्य आजमा रही हैं, जिनकी अपनी कोई पहचान नहीं है। पतियों की पहचान को भुनाने का प्रयास इन महिला प्रत्याशियों द्वारा किया जा रहा है। इसी प्रकार वार्ड पार्षद के चुनाव में भी कई गृहिणी महिलाएं कूद पड़ी हैं। इन्होंने न कभी सामाजिक कार्य किया और न ही दूर-दूर तक राजनीति से वास्ता रहा है। मतदाताओं को लुभाना इनके पक्ष में नहीं है। मेयर पद पर कम से कम आधा दर्जन प्रत्याशी ऐसी हैं, जिनके स्थान पर उनके पति ही चुनाव प्रचार की कमान थामे हैं। मीडिया अथवा मतदाताओं से बातचीत करनी होती है, तो पति ही प्रत्याशियों के स्थान पर जबाव देते हैं। एक महिला प्रत्याशी ने कहा कि हम का बोले, यही बोले कि खड़ी हो जाओ, तो चुनाव में कूद गये। अब जो कुछ करेंगे, यही करेंगे। पति महोदय भी पतियों को लेकर दिनभर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसी प्रकार एक नेताजी हैं। कई वर्षो से राजद से जुड़े हैं। दलीय आधार पर चुनाव नहीं होने के कारण उन्हें चुनाव चिन्ह लालटेन नहीं मिल पाया। नेताजी चुनाव प्रचार के दौरान अक्सर भूल जाते हैं कि उनका चुनाव चिन्हा दूसरा है। वह मतदाताओं से बातचीत करने के क्रम में भूल जाते हैं और कहते हैं कि लालटेन छाप पर मुहर लगाकर हमें विजयी बनायें। जब उनके समर्थक समझाते हैं, तब नेताजी चुनाव आयोग द्वारा आवंटित चुनाव चिन्ह की बात करते हैं।ं

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