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कश्मीर के बयान से फंसे पाक मंत्री

भारतीय नागरिक कश्मीर सिंह की पाकिस्तानी जेल से 35 साल बाद स्वेदश वापसी में अहम भूमिका अदा करने वाले पाकिस्तान के कार्यकारी मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी ने इस मामले में अपनी भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। असांर बर्नी ने कहा कि मैं कश्मीर सिंह के कारण इस मामले में शामिल नहीं हुआ। मैंने मानवीय दृष्टि से इस मामले को लिया। यदि उसने जासूस होना कबूल कर लिया तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैंने कुछ गलत किया है। उन्होंने कहा कि यदि वह जासूस था तो उसे इसकी सजा मिल चुकी है क्योंकि वह जेल में 35 साल गुजार चुका है। मैंने उसका मामला मानवीय आधार पर लड़ा था। मानवाधिकार वकील अंसार बर्नी ने कहा कि मैं भारत जाने का प्रयास करुंगा और मानवीय आधार पर पाकिस्तानी और भारतीय कैदियों की रिहाई के लिए अपने प्रयास जारी रखुंगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान की लाहौर जेल में पिछले 35 साल से बंद एक और भारतीय कैदी कश्मीर सिंह रिहा होने के बाद हाल ही में भारत पहुंचा। कश्मीर सिंह को पाकिस्तान से भारत में तस्करी करने के आरोप में 1में रावलपिंडी से गिरफ्तार किया गया था। बाद में जासूसी के आरोप में पिछले 35 सालों से जेल में बंद रखा गया था। इसी आरोप में उसे मौत की सजा भी सुना दी गई थी। सजा से मुक्ित के लिए उसने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के समक्ष क्षमादान का आवेदन किया था, जिसे उन्होंने मानवीय आधार पर स्वीकार कर उसे आरोप से बरी कर दिया था।

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