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बिफरे फहीम, पीपीपी में टूटके संकेत

भूतपूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद भी पाकिस्तान में जम्हूरियत की राह आसान नहीं दिख रही। पार्टी के उपाध्यक्ष फहीम ने जरदारी के खिलाफ खुलकर अपना असंतोष जाहिर किया। इसे पार्टी में संभावित टूट का संकेत माना जा रहा है। पीपीपी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता मकदूम अब्दूल फहीम ने पार्टी नेता आसिफ अली जरदारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनको प्रधानमंत्री के रूप मे घोषित किए जाने में हो रही देरी से लोगों में यह आम धारणा बन रही है कि उन्हें अपमानित किया जा रहा है और जरदारी उनके इतन वषरे के कायरे को अनदेखी कर उनको अलग-थलग करने में जुटे हैं। उनके इस बयान को पार्टी में दरार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस देरी से पार्टी के अंदर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के तीन दिन बाद ही एक प्रेस कांफ्रेंस में जरदारी ने यह घोषित किया था कि बेनजीर फहीम को ही प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में देखना चाहती थी, लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी की संसदीय समिति करेगी, लेकिन अभी तक इसकी घोषणा नहीं कि गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने हुए चुनाव में पीपीपी ने शानदार जीत हासिल की थी और पार्टी ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया था। जरदारी ने यह भी कहा कि जरदारी को तब तक पार्टी को एक रखने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए, जब तक बिलावल भुट्टो पार्टी की कमान नहीं संभाल लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे नहीं लगता कि जरदारी अपनी मर्जी से किसी और को प्रधानमंत्री बनाने का प्रयास करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि अगर उनको प्रधानमंत्री के रूप में नामित नहीं किया जाता तो उस पर उनका क्या रद्देअमल होगा, तो उन्होंने कहा कि उस स्थिति से निपटने के लिए उनके पास खास योजना है, जिसका खुलासा वह समय आने पर करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री पद को लेकर उनकी जरदारी से कोई बातचीत हुई है तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन दोनों के पास इतना वक्त नहीं मिल पाया है कि वे एकसाथ बैठकर इस मुद्दे पर बात कर सकें। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न तो पीपीपी उन्हें छोड़ना चाहती है और न ही वहजुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी को छोड़ना चाहते हैं। फहीम लोकतंत्र बहाली के लिए बने संगठन के अध्यक्ष भी हैं और राजनीतिक रूप से वह पीपीपी के गढ़ सिंधसे आते हैं।ं

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