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पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर..

बिरले संयोग आता है जब अमर, अकबर और एंथोनी तीनों एक साथ मिलते हों। और आज वह संयोग आ गया। तीनों मिले और खूब मिले। जैसे अमर अकबर, अकबर और एंथोनी एक ही पिता के पुत्र थे, वैसे ही ये तीनों भी एक ही हेडमास्टर के शिष्य रहे हैं और कभी एक ही घराने से ताल्लुक रखते थे। इनमें से दो पहले राज्य के मुखिया रह चुके हैं और एक अभी भी मुखिया हैं। दो पूर्व में से एक भविष्य के दावेदार बताये जाते हैं। पर कुर्सी की चाहत में तीनों से वैसे ही अलग हो गये, जैसे किसी भावना प्रधान फिल्म में ट्रेन दुर्घटना में तीन भाई बिछुड़ जाते हैं। वर्तमान हनी साहब, भूतपूर्व ललबबुआ जी और महाभारत के महानायक उड़न खटोला में एक साथ उड़े। यह संयोग शायद ही आया हो। समय बलवान होता है, इसका नजारा इसी से मिलता है कि तीनों जब सामने पड़ते हैं तो मुंह फेर लेते हैं। कभी मुंह में मुंह मिला कर सियासत की बात करते थे। जनता के सामने तो भले ही एक दूसरे पर तलवार निकाल लेते हैं, लेकिन उड़न खटोलवा में जमकर बीते दिनों की बात होती है। ठहाके भी लगते हैं। होना भी चाहिए राजनीति से हट कर आत्मीयता और भाईचारा भी कोई चीज होती है। राज्य से बाहर तो पार्टी पोलटिक्स भुला कर झारखंडी हृदय एक हो जाता है। आखिर सबका लक्ष्य तो जनता की सेवा ही है, भले ही सेवा का मार्ग अलग-अलग हो।

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  • Web Title: पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर..