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सुखी महिलाओं से ही सुखी होगा समाज : मायावती

मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को यहाँ कहा कि समाज में आधी संख्या महिलाओं की है, जिन्हें स्वस्थ, समृद्ध और सुखी बनाए बगैर कोई समाज प्रगति नहीं कर सकता है। समाज में किस तरह महिलाओं का सम्मान बढ़ाया जाए और उन्हें बराबरी का दर्जा देकर देश, प्रदेश और समाज की उन्नति में बराबर का हिस्सेदार बनाया जाए, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकास खंड स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिला आयोग में पूर्णकालिक माँग के संबंध में आवश्यक मूल्याँकन कराकर आयोग की जरूरतों के मुताबिक उचित निर्णय शीघ्र लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने मान्यवर कांशीराम जी सशक्तीकरण पुरस्कार देने की व्यवस्था की है। इसके अलावा पहली बार महिला निधि की स्थापना की है।ड्ढr इससे पहले राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष आभा अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महिलाओं से शिक्षा को अपना हथियार बनाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लुत्फ लिया और विभिन्न जिलों के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रदर्शित की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।ड्ढr समारोह में पार्टी महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र, काबीना मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव प्रशांत कुमार मिश्र भी मौजूद थे। ‘तो जीता-जागता उदाहरण मैं खुद हूँ’ लखनऊ (प्रसं)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भी मुख्यमंत्री मायावती महापुरुषों को याद करना नहीं भूलीं। उलटे उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ही महाराष्ट्र के महात्मा ज्योतिबा फुले, संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर और बसपा संस्थापक स्व. कांशीराम को नमन करने के साथ की। उन्होंने कहा कि महात्मा फुले ने पुणे में सबसे पहले बालिकाओं की शिक्षा के लिए कदम उठाया। इसके लिए उन्होंने पहले अपनी पत्नी को शिक्षित कराया। फिर विरोध के बावजूद पत्नी को अन्य बालिकाओं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के मामले में बाबा साहब अंबेडकर महात्मा फुले को अपना गुरु मानते थे। बाबा साहब ने संविधान में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का कानूनी दर्जादिया। इन दो महापुरुषों के बाद स्व. कांशीराम ने दबी-कुचली महिलाओं को आगे लाने का काम किया।ड्ढr स्व. कांशीराम ने प्रारम्भ में जब डीएस-4 व बामसेफ संगठन बनाएँ तो उसमें भी बगैर भेदभाव महिलाओं को भरपूर स्थान दिया और जब उन्होंने बसपा की स्थापना कर राजनीतिक प्लेटफार्म बनाया तो भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को आगे बढ़ाया जिसका जीता-जागता उदाहरण मैं स्वयं हूँ। वर्ष 1में मैं बसपा की पहली सांसद और लोकसभा में दलीय नेता बनीं। जब बसपा को सरकार बनाने का मौका मिला तो भी उन्होंने मुझे चुना और मुख्यमंत्री बनाया।ड्ढr उन्होंने कहा कि जब उनकी तबियत खराब हुईं तो उन्होंने पार्टी की बागडोर मुझे देते हुए मुझे ही राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया।

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