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चिविवि में निजी सहयोग को बेहतर मानती हैं प्रो.सरोज

छत्रपति शाहू जी महाराज चिविवि की नवनियुक्त कुलपति प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल मेडिकल विश्वविद्यालय में सार्वजनिक-निजी सहयोग (पीपीपी) को बेहतर मानती हैं। उनके मुताबिक निजी क्षेत्रों के सहयोग से पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ती है। मरीजों को सस्ता इलाज और जाँच की सस्ती सुविधा अस्पताल में ही मिल जाती है। बाहर नहीं जाना पड़ता। लेकिन इसके साथ ही निजी क्षेत्रों की यूनिटों पर निगरानी भी जरूरी है। उनके लिए बने कायदे-कानून मरीजों की सहूलियत के लिए होने चाहिए।ड्ढr प्रो. गोपाल शनिवार को यहाँ चिविवि के ह्वाइट हाल में संवाददाताआें से मुखातिब थीं। इसके पूर्व उन्होंने पूर्णकालिक कुलपति का कार्यभार ग्रहण लिया। वे चिविवि की चौथी पूर्णकालिक व पहली महिला कुलपति हैं। अभी तक कुलपति का कार्यभार माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एसके अग्रवाल के पास था। प्रो. गोपाल ने एक-एककर अपनी प्राथमिकताएँ गिनाईं। प्रो. गोपाल का कहना है कि मरीजों की बेहतरी के लिए वे कोई कोर-कसर नहीं छोडें़गी। मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएँगी। चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले उच्च स्तरीय शोध-अनुसंधान को प्राथमिकता के तौर पर रखा जाएगा। क्योंकि इस क्षेत्र में छात्र व शिक्षकों की समान भागीदारी रहती है। मरीजों को भी इसका लाभ मिलता है। शिक्षकों व छात्रों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। छात्रों को मानवीय मूल्यों का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष तौर से प्रशिक्षित किया जाएगा। आए दिन तीमारदारों व रेजीडेंट डॉक्टरों के बीच मारपीट की घटनाएँ होती हैं। इसकी वजह छात्रों की नैतिक शिक्षा में कमी है। अभी तक एमबीबीएस कोर्स में मानव स्वभाव की गरिमा के सम्बंध में जानकारी देने के लिए अलग से कोई पाठय़क्रम नहीं है। पर भविष्य में इसे पाठय़क्रमों में शामिल करने की कार्रवाई होगी। फिलहाल छात्रों को मानवता का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष लेक्चर होंगे। कुलपति मेडिकल शिक्षा में छात्र संगठन के पक्ष में तो नहीं हैं पर उनका मानना है कि कुछ ऐसे मंच होने चाहिए जिससे छात्रों के व्यक्ितत्व का बहुआयामी विकास संभव हो सके। प्रो. गोपाल का कहना है कि सकारात्मक सोच, विचार व संकल्प के साथ कर्मठता किसी भी व्यक्ित या संस्थान की कामयाबी की कुंजी है। इस मौके पर प्रो. एसके अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन शंखवार व रजिस्ट्रार सुरेन्द्र विक्रम मौजूद थे।

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