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इसबार धान खरीद अभियान की हो रही सख्त चौकसी

र्जी आंकड़ेबाजी पर काबू पाने के लिए इस बार धान खरीद अभियान की सख्त चौकसी हो रही है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग हरेक एजेंसी से मिली सूचनाओं की जिलों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के रिकॉर्ड से लगातार मिलान कर रहा है। क्रॉस चेकिंग का मूल मकसद पिछले खरीफ मौसम में हुई फजीहत से बचना है।ड्ढr ड्ढr दरअसल गत वर्ष एजेंसियों ने सरकार को लगभग 7.20 लाख टन धान खरीदे जाने की सूचना दे दी लेकिन हकीकत में एफसीआई को तीन लाख टन धान कम मिला। सख्ती का ही परिमाण है कि चालू खरीफ मौसम में अबतक 3.54 लाख टन धान और 22243 टन लेवी चावल की प्राप्ति हुई है जबकि गत वर्ष इतने ही समय में 4.0 लाख टन की खरीद हुई थी।ड्ढr ड्ढr सूत्रों की मानें तो पिछली बार चावल की कीमत कम होने के अंदेशे में कई धान खरीद केन्द्रों ने आंकड़ा बढ़ाकर पेश किया था। गत वर्ष चावल का बाजार भाव तो कम नहीं ही हुआ, विभाग और एफसीआई के लिए भी यह अबूझ पहेली बन गयी कि आखिर तीन लाख टन धान गया कहां? तहकीकात में यह बात सामने आयी कि लगभग 1000 पैक्सों के पास पिछले वर्ष का धान बकाया है। बड़े बकायेदारों में बिस्कोमान, नेफेड और नेशनल कोलेटरल मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (एनसीएमएसएल) भी शामिल है। सरकार की सख्ती के बाद बिस्कोमान ने तीन कर्मियों को निलंबित कर दिया जबकि दूसरी एजेंसियों में भी ऐसी ही प्रक्रिया जारी है। वैसे इस वर्ष एफसीआई ने 76860 टन, राज्य खाद्य निगम ने टन, बिस्कोमान ने 5374टन, पैक्स-कृषक सहकारी समितियों ने 174415 टन, नेफेड ने 66टन, एनसीएमएसएल ने 111टन और सरकारी राशन दुकानदारों ने 1171 टन धान खरीदा है। अनुमान है कि 31 मार्च तक लेवी चावल समेत छह लाख टन धान की वास्तविक खरीद हो पायेगी।

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