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ऐसे हुआ ब्रह्मोस का परीक्षण!

गत पांच मार्च को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के एक निर्जन द्वीप पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के ‘लैंड अटैक’ संस्करण का जो अचूक और सफल परीक्षण किया गया, उसकी तैयारी तीन वर्ष पूर्व शुरू की गई थी। डीआरडीओ परियोजना के प्रमुख डॉ. शिवथनु पिल्लै ने स्वयं 500 से ज्यादा द्वीपों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद इस द्वीप का चयन किया था। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने उनसे लिखित गारंटी मांगी थी कि परीक्षण से द्वीप के पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। विभिन्न मंत्रालयों और प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी के बाद यह परीक्षण संभव हो सका। ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष मुलाकात में डॉ. पिल्लै ने बताया कि ब्रह्मोस के जहाज से जहाज पर मार करने वाले संस्करण को नौसेना में शामिल कर लिया गया है, लेकिन जहाज से किसी बंदरगाह या तटवर्ती संवेदनशील संस्थान को ध्वस्त करने के लिए मिसाइल में कुछ परिवर्तन किया गया। विशेष रूप से, लक्ष्य को तलाश करने के लिए मिसाइल के ‘सीकर’ में परिवर्तन किया गया। उन्होंने बताया कि चुने गए द्वीप पर पहुंच कर राडार रिफ्लेक्टर लक्ष्य को बैठाना काफी कठिन था। इसके लिए डीआरडीओ के कुछ लोगों को 300 मीटर से ज्यादा दूरी तैर कर पार करनी पड़ी। लक्ष्य के लिए ढांचा हेलीकॉप्टर से उतारा गया। द्वीप को परीक्षण के लिए तैयार करने में लगे लोगों की चमड़ी झुलस गई। उनके शरीर पर छाले पड़ गए। इस मिसाइल का निशाना इतना अचूक था कि आईएनएस राजपूत से दागे जाने के बाद इसने चिन्हित लक्ष्य को ही ध्वस्त किया, जबकि आस-पास चट्टानें, पेड़ और यहां तक कि नौसेना के दस जंगी पोत भी थे। डॉ. पिल्लै ने बताया कि वह इस मिसाइल के प्रदर्शन के प्रति पूरी तरह आश्वस्त थे। इस समय दक्षिणी अमेरिका, खाड़ी क्षेत्र और दक्षिण पूर्व एशिया के कई देश ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने को लालायित हैं। थलसेना में भी इन्हें शामिल किया जा चुका है। ब्रह्मोस के वायुसेना संस्करण को 2010 तक तैयार कर लिया जाएगा।

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