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राजा आम नेपाली की तरह रहें : भट्टराई

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष सिद्धांतकार बाबूराम भट्टराई ने कहा कि संविधान सभा का चुनाव उनके देश के लिए एक युगांतरकारी घटना है। चुनाव में बहुमत मिलने पर पार्टी महासचिव पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ही फेडरल रिपब्लिक नेपाल के पहले राष्ट्राध्यक्ष बनेंगे। राजा ज्ञानेंद्र आम नेपाली की तरह रहें वरना उन्हें (देश से बाहर) जाना होगा। कानून का उल्लंघन करने पर उसका खामियाजा भी भुगतना होगा। देश के ऐतिहासिक-गोरखा निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ रहे भट्टराई ने ‘हिन्दुस्तान’ से खास मुलाकात में कहा कि पार्टी की नीतियों और सरोकारों से भारत को कोई खतरा नहीं है। हम राजशाही के खात्मे और न्यू नेपाल फेडरल रिपब्लिक की स्थापना के लिए लड़ रहे हैं। नए नेपाल की सरकार से भारत को फोयदा होगा, नुकसान नहीं। भारत के हम अच्छे पड़ोसी साबित होंगे। नेपाल के आर्थिक विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राजशाही आए दिन भारत-चीन के बीच झगड़े पैदा करने की जुगत में रहती थी। न्यू नेपाल भारत-चीन के बीच सेतु बन सकता है। भट्टराई ने संविधान सभा के बाद के अपने एजेंडे की चर्चा करते हुए कहा कि नई सरकार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक क्रांति का काम पूरा करते हुए न्यू ट्रांजिशनल इकोनामिक पालिसी लागू करनी होगी। सामंतवादी संरचना खत्म करते हुए देशी किस्म के औद्योगिक पूंजीवादी विकास को बढ़ावा देना होगा। अपने अपार जलसंसाधन का सही इस्तेमाल करना होगा। हम चाहेंगे कि भारत से हमारा रिश्ता और प्रगाढ़ हो। सड़क और रेल मार्ग के विस्तार से हमारा संपर्क और जीवंत हो सकता है। नेपाल में औद्योगिक विकास के लिए भारत का सहयोग जरूरी होगा। भट्टराई संगठन में विदेश मामलों के प्रभारी भी हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि संविधान सभा के गठन के बाद बनने वाली सरकार विदेश नीति को नया रूप देगी। उन्होंने इसका खंडन किया कि नेपाली माओवादियों और बिहार-आंध्र के माओवादियों ने मिलकर नेपाल से भारत के बीच एक लाल गलियारा तैयार किया है या ऐसी कोई योजना है। उन्होंने कहा कि नेपाली गृहयुद्ध के दौरान भी उनकी पार्टी का भारत के गुटों से हथियारों का कोई लेन-देन या सांगठनिक समन्वय नहीं था।

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