DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एनडी तिवारी सरकार का घोटाला उजागर

जो कोम 45 लाख में हो सकता था। उस पर उडा़ दिए 23 करोड़। दो साल पहले उत्तराखंड में ऐसा ही हुआ। मामला अमेरिकन एयरक्राफ्ट की खरीद से जुड़ा है। दिसम्बर 2005 में उत्तराखंड सरकार ने पुराने एयरक्राफ्ट के बदले नया वायुयान खरीदा। इस उड़नखटोले की खरीद में नियमों को दरकिनार कर अधिकोरियों ने भारी गोलमाल कि या। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सरकार ने 23 करोड़ के वायुयान की खरीद व रखरखाव पर अनावश्यक व्यय किया। बिना टेंडर तक नीकी व क्रय समिति की रिपोर्ट पर गुपचुप सौदा कर लिया। रिपोर्ट में अनाप-शनाप खर्चे पर भी सरकार को लताड़ लगाई है। ‘हिन्दुस्तान’ ने वायुयान खरीद पर उंगली उठायी थी। गौरतलब है कि मार्च 2004 में सरकार ने 20.41 करोड़ की लागत से एक डबल इंजिन हेलीकॉप्टर-ई सी 135 खरीदा था। दो साल में 23 करोड़ के दूसरे वायुयान की खरीद का कोई औचित्य नहीं था। यह खरीद भी ऐसे समय पर की गयी, जब राज्य के जौलीग्रांट हवाई अड्डे में हैंगर की व्यवस्था ही नहीं थी। लिहाजा वायुयान को दिल्ली में खड़ा करना मजबूरी बन गया। मुख्यमंत्री व विशिष्ट लोगों को लाने के लिए वायुयान जौलीग्रांट में उतरता। और फिर दिल्ली लौटता। रिपोर्ट में कई तथ्यों का खुलासा किया गया है। मसलन जनवरी 2006 से जून 2007 तक एयरक्राफ्ट ने 63.10 घंटे ही उड़ान भरी जबकि इसके रखरखाव पर 20.लाख रुपए व्यय किए गए। यही नहीं 23 करोड़ का वायुयान होने के बावजूद विशिष्ट लोगों के प्रयोग पर 11.16 लाख खर्च कर निजी संस्थाओं से भी किराए पर हेलीकाप्टर लिए गए। 23 करोड़ के इस विमान के पायलट का उपयोग हुआ, जबकि पायलट के वेतन भत्तों पर 35 लाख रुपए खर्च हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पट्टे पर लिए गए वायुयान की 63.10 घंटे की उड़ान पर 45 लाख खर्च होता। सरकोर की तकनीकी समिति ने अमेरिकन कंपनी मसेर्स रेथन एयरक्राफ्ट के वायुयान की खरीद में ग्लोबल टेंडर आमंत्रित करने के बजाए व्यापार एवं वाणिज्य उड्डयन-2004 से पांच वायुयानों के नमूनों के आधार पर ‘सुपर किंग एअर बी -200’ वायुयान की खरीद को हरी झंडी दे दी गई। कांग्रेस सरकार ने फरवरी 2005 में राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग व अन्य प्रमुख अधिकारियों ने वायुयान की खरीद के लिए एक समिति का गठन किया था। जबकि कैग की रिपोर्ट इशारा करती है कि समिति के गठन से पूर्व दिसम्बर 2004 में एयरक्राफ्ट को खरीदने का फैसला लिया जा चुका था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1अप्रैल 2005 को तत्कालीन मुख्य सचिव व वित्त सचिव समेत चार सदस्यीय क्रय समिति ने तकनीकी समिति की अनुशंसा पर विमान खरीद की मोहर लगाई। रिपोर्ट में इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई गई कि क्रय समिति ने सरकार के पुराने वायुयान की आयु पर विशेष ध्यान केन्द्रित कर नये एयरक्राफ्ट की आवश्यकता पर बल दिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: एनडी तिवारी सरकार का घोटाला उजागर