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हरियाली व जलसंचयन के लिए जगह तो छोड़ दीजिए!

अतिक्रमण हटे पर हरियाली और भूजल संचयन के लिए भी जगह हो। इन दिनों शहर भर में चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर लोगों का गुस्सा इसी बात को लेकर है कि हरियाली को उजाड़ा जा रहा है। उसके बाद कई जगह नगर निगम खुद ही सड़क किनारे बनी जमीन पर इन्टरलॉकिंग टाइल्स लगाकर पक्का बना रहा है। इससे भूजल संचयन के लिए बची-खुची जगह भी खत्म हो जाएगी। कई जगह तो टाइल लगने से सड़क और फुटपाथ का फासला खत्म हो चुका है, जिससे ये स्पॉट पैदल यात्रियों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।ड्ढr हाईकोर्ट का दबाव बनने के बाद नगर निगम ने पिछले महीने से शहर में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया। यहाँ खास बात यह रही कि इसकी शुरुआत इन्दिरा नगर और गोमती नगर में लोगों के किचेन गार्डेन से की गई। लोगों की शिकायत यह है कि अवैध कब्जे हटाए जाएँ लेकिन इसके नाम पर बेवजह परेशान न किया जाए। कई लोगों के घरों के सामने पेड़-पौधे लगे थे और उन्होंने नालियों पर कब्जा भी नहीं किया था लेकिन नगर निगम के दस्तों ने बुलडोजर से उन्हें रौंद दिया। यही हाल कुर्सी रोड पर किया गया। यहाँ के लोगों ने नगर विकास मंत्री से भी इसकी शिकायत कर खुद सरकार के उस शासनादेश का हवाला दिया है जिसमें घरों के आगे पौधे लगाने की अनुमति दी गई है। इस शासनादेश में कहा गया है कि यदि यह पौधे सड़क और नालियों को बाधित नहीं करते तो उन्हें न हटाया जाए। एलडीए ने तो खुद विज्ञापन जारी करके कहा था कि लोगों के घरों के आगे बने रैम्प नहीं तोड़े जाएँगे। लेकिन जानकीपुरम में कई लोगों के रैम्प भी तोड़ दिए। उनका कहना है कि घर के आगे के बाकी हिस्से में उन्होंने कोई कब्जा नहीं किया। सिर्फ रैम्प बनाया था। रैम्प के बिना घर में वाहन कैसे ले जाएँगे। इन्दिरा नगर के ए-ब्लॉक में तो लोगों के घरों के आगे हरे-भरे बगीचे तोड़कर अब इन्टरलॉकिंग टाइल्स लगाई जा रही हैं।ड्ढr इसी तरह महानगर में नालियाँ बनाकर उसके आगे टाइल्स से फुटपाथ बनाई जा रही हैं। बड़े-बड़े पेड़ों की जड़ों तक यह टाइल्स आ जाएँगे। यह टाइल्स तो वर्षा जल संचयन में बाधक हैं। लोगों ने यह भी सुझाव दिए हैं कि इसकी जगह सड़क के किनारे कच्ची जगह पर सर्विस लेन बना दी जाए तो अच्छा होगा। इसी तरह रहीमनगर से रिंग रोड की आेर जाने वाले पिकनिक स्पॉट रोड की बाईं पटरी पर टाइल्स लगाने का काम चल रहा है। सड़क नाले से सटी होने के कारण वहाँ पर यूँ ही डेढ़-दो फुट की जगह पैदल यात्रियों के लिए नहीं मिलती। सड़क के लेबिल से टाइल्स लग जाने के बाद पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए तेज वाहनों से खुद को बचाने के लिए नाले में कूदने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। इस बारे में अपर नगर आयुक्त हरवीर सिंह कहते हैं कि कहीं भी पेड़ नहीं काटे जा रहे हैं। इन्टरलॉकिंग टाइल्स से फुटपाथ इसलिए बनाई जा रही है ताकि लोग दोबारा कब्जा न कर लें। यह टाइल्स जलसंचयन के लिए भी नुकसानदेह नहीं हैं। उनके बीच दरारों से होकर पानी जमीन के भीतर चला जाता है।

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  • Web Title: हरियाली व जलसंचयन के लिए जगह तो छोड़ दीजिए!