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शटरतोड़वा गिरोह:बदनाम हैं तो क्या नाम न होगा

विकास के मामले में भले ही निचले पायदान पर हो लेकिन आरचा कम्पनी (शटर तोड़ गिरोह) के नाम व धंधे से घोड़ासहन राष्ट्रीय पटल पर चर्चित है। मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, आन्ध्र प्रदेश, कोलकाता और खबरों के अनुसार बैंकाक, थाईलैंड, काठमांडू, आदि की जेलों में इसके 40 से अधिक सदस्य बन्द हैं। पिछले पखवारे तमिलनाडु, आन्ध््रा प्रदेश, बंगलोर आदि की पुलिस पूर्वी चम्पारण के घोड़ासहन में छापेमारी कर चुकी है।ड्ढr ड्ढr इस कंपनी का मुख्य धंधा घड़ी, मोबाइल, स्वर्णाभूषण दुकानों का शटर तोड़ सामान गायब कर पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में बेचना है। सिकरहना अनुमंडल के घोड़ासहन, बीजबनी, महुआही, घोंघिया, जितना, श्रीपुर कवैया, अठमुहान, अमवा, करसहिया के अतिरिक्त रक्सौल, मोतिहारी व सीतामढ़ी के ढेंग, मूसाचक, बैरगनिया आदि में कम्पनी के करीब 500 सदस्य सक्रिय हैं, जिन्हें स्थानीय पुलिस व कतिपय सफेदपोशों का संरक्षण मिलता है। सिकरहना डीएसपी अनंत राय ने रविवार को शटर तोड़ गिरोह की सक्रियता व दूसरे प्रदेशों में इसके सदस्यों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में एक पूर्व जिला पार्षद की खोज की जा रही है।ड्ढr ड्ढr जानकारों के अनुसार एक आरचा कम्पनी में आठ से दस सदस्य होते हैं जो बाहर जाने पर थ्री स्टार होटलों में ठहरते हैं। सदस्य दिन में शहर में घूमकर ‘टारगेट’ दुकान का चयन करते हैं और रात्रि में संबंधित दुकान के बाहर फूटपाथ पर सोते हैं और छोटे जक से शटर उठा एक ही रात में लखपति को खाकपति बना फुटपाथ पर ला देते है। इस गिरोह में रिंग लीडर व एक प्लेयर के नाम से सदस्य होता है। प्लेयर दुकान में घुसकर सामान निकालता है। गिरोह के सदस्यों व धंधे का अलग कोड वर्ड होता है। इस कम्पनी के सदस्य अपने क्षेत्र घोड़ासहन व आसपास में शटर तोड़ने से परहेज करते है ताकि पुलिस उनके पीछे न पड़े। चोरी के सामान का बाजार मुख्यत: नेपाल सीमा क्षेत्र ही होता है।

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