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व्यक्ितगत राजस्व वसूली लक्ष्य प्राप्त नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई

मार्च का महीना परिवहन विभाग के कई अधिकरियों के विदाई समारोह की पृष्ठभूमि तैयार करेगा। विभाग ने मार्च में दस-दस लाख रुपये का व्यक्ितगत राजस्व वसूली लक्ष्य प्राप्त नहीं करने वाले अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी है।ड्ढr ड्ढr कर उगाही में पिछड़ने वाले जिला परिवहन पदाधिकरियों की सेवा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग जबकि प्रवर्तन पदाधिकारियों की सेवा पुलिस मुख्यालय को वापस कर दी जायेगी। मोटर वाहन निरीक्षकों पर विभागीय कार्रवाई चलेगी।ड्ढr विभागीय सूत्रों की मानें तो आमतौर पर अधिकारियों में वाहनों की जांच की डय़ूटी लेने के लिए होड़ मची रहती है लेकिन इसका राजस्व पर कभी कोई खास असर नहीं दिखता। इसी का नतीजा है कि तमाम रस्साकसी के बावजूद विभाग को औसतन 20 करोड़ रुपये ही प्रति माह राजस्व हासिल हो पाता है।ड्ढr विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 216 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। लिहाजा सभी डीटीओ को ट्रेड टैक्स के बकायेदारों और सर्टिफिकेट केस के मामलों पर खास ध्यान देने जबकि प्रवर्तन पदाधिकारियों को टैक्स डिफाल्टर और नियम तोड़कर परिचालित होने वाले वाहनों के खिलाफ खास मुहिम चलाने को कहा गया है। तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएंड्ढr पटना (हि. ब्यू.)। राज्य सरकार ने तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। लगभग 1टन कच्चे तसर के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत विभिन्न जिलों में 170 हेक्टेयर में की जा रही तसर की खेती के अलावा लगभग साढ़े तीन सौ हेक्टेयर में नई किस्मों की खेती की जाएगी। नावादा जिले के कौआकोल इलाके के अलावा बांका जिले के श्यामबाजार, इनराबरान एवं कटोरिया में यह विस्तार होगा। 11वीं पंचवर्षीय योजना में तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 302 लाख की योजना सरकार द्वारा बनाई गई है। सरकार उन्नत किस्म को बीज भी तसर की खेती में जुटे किसानों को उपलब्ध करायेगी। सरकार का दावा है कि तसर उद्योग को बढ़ावा देने से लगभग साढ़े पांच सौ लोगों को लाभ मिलेगा। खाद्य प्रसंस्करण प्रक्षेत्र के विकास के लिए मिलेगा धनड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण प्रक्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि देगी। इस उद्योग के माध्यम से सूबे की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए भी सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना बनाई है। यही नहीं सरकार इस प्रक्षेत्र को रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने की भी योजना बना रही है। खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की विभिन्न परियोजनाओं के लिए सरकार ने 18 करोड़ 50 लाख रुपए जारी किए हैं। इस राशि से वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, कटिहार में दो फूड पार्क, इंटीग्रेटेड फूड जोन, चावल मिल, क्लस्टर रूरल बिजनेस सेंटर आदि खोले जाएंगे। इन परियोजनाओं को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत विकसित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी और अन्य योजनाओं को पूरा करने के लिए जितनी धनराशि की जरूरत होगी, वह उपलब्ध कराएगी।ड्ढr आपूर्ति निरीक्षकों को वेतन भुगतान का संकट खत्म होने के आसारड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राज्य के आपूर्ति निरीक्षकों और पणन पदाधिकारियों के वेतन भुगतान का संकट खत्म होने के आसार बढ़ गये हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जिलों को व्यय विवरणी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि उन्हें आवश्यकता के हिसाब से राशि दी जा सके। गत दिनों विभाग की राज्यस्तरीय बैठक में जिला आपूर्ति पदाधिकारियों ने आपूर्ति निरीक्षकों और पणन पदाधिकारियों के वेतन संकट का मामला उठाया। उनका कहना था कि वेतन-भत्ता मद में राशि नहीं होने की वजह से भुगतान में परेशानी हो रही है। इस पर सभी जिलों को व्यय की गयी राशि के साथ बजट की मांग करने का निर्देश दिया गया। विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना व्यय विवरणी प्राप्त हुए बजट उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है।ड्ढr ‘राजस्व सम्वर्ग’ का गठन होड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। प्रदेश में भूमि सुधार की समस्याओं से नित-प्रतिदिन जूझ रहे बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने राजस्व कार्यो के निचले स्तर पर शीघ्र निष्पादन के लिए ‘राजस्व सम्वर्ग’ के गठन की मांग की है। बिहार प्रशासनिक सेवा संघ ने राज्य सरकार से हर दस गांव पर एक राजस्व कर्मचारी की तैनाती का आग्रह किया है। अभी औसतन 30 गांवों पर एक राजस्व कर्मचारी की व्यवस्था है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण मुरारी शर्मा एवं महासचिव बिपिन कुमार सिन्हा ने राजस्व प्रशासनिक ढांचा में सुधार के लिए भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष डी. बंदोपाध्याय को अपनी अनुशंसाओं से अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा है कि भविष्य की खतरनाक स्थितियों से बचने के लिए प्राथमिकता के तौर पर भू-सर्वेक्षण कराया जाए। बिहार कास्तकारी अधिनियम 1885 के अन्तर्गत भू-सर्वेक्षण का काम पिछले कई दशकों से नहीं हुआ है। भू-राजस्व प्रशासन को पटरी पर रखने के लिए विशेष अभियान चलाकर समय सीमा के अन्तर्गत भू-सर्वेक्षण का कार्य हो और इसके आधार पर तैयार खतियान को वेबसाइट पर दिया जाए ताकि निबंधन और नामांतरण की प्रक्रिया आसानी से की जा सके।ं

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