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झारखंड में अफसरों की रही चांदीझारखंड में अफसरों की रही चांदी

झारखंड सचिवालय के चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का आत्मदाह अप्रत्याशित नहीं है। सूबे में अफसरों को जहां प्रमोशन और वेतनवृद्धि का लाभ मिलता रहा, वहीं चौथे दर्जे के कर्मचारियों को दुत्कार-फटकार और उपेक्षा ही नसीब हुई। एसीपी और बोनस की मांग को लेकर आंदोलित इन कर्मियों की फाइलें बाबुओं के मेज की धूल चाटती रहीं। अधिकारियों-कर्मचारियों को दी गयी प्रोन्नति और वेतन बढ़ोत्तरी के लाभ से इनकी तुलना की जाये तो असमानता की खाई साफ दिखती है।ड्ढr सीएस के चार पद, प्रोन्नति मिली पांच कोड्ढr राज्य में सीएस संवर्ग के चार पद सृजित हैं। एके मिश्र की सेवानिवृति से इस संवर्ग का एक पद सितंबर में रिक्त हुआ। सचिव के भी कुछ पद रिक्त हैं। बगैर बहुत देर के इन पदों पर प्रोन्नति के लिए चार मार्च को डीपीसी की बैठक बुला ली गयी थी। थोड़ा उससे पूर्व चलें तो बगैर केंद्र की सहमति के एके चुघ के छुट्टी पर जाने को रिक्ित मानते हुए आनन-फानन में एके बसु और मुखत्यार सिंह को प्रोन्नति दे दी गयी। जबकि सीएस रैंक में पहले से पीपी शर्मा, एके मिश्रा और एके चुघ के होने के कारण एक ही पद नियमत: रिक्त हो रहा था। हालांकि इसे केंद्र ने बाद में अस्वीकार कर दिया।ड्ढr डीजीपी के दो पदों के विरुद्ध तीन को प्रोन्नतिड्ढr दूसरे शीर्ष पद डीजीपी के पद पर प्रोन्नति के मामले में भी सरकार और अधिकारियों ने ऐसी ही आपाधापी दिखायी। इस वजह से नियम कानून की अनदेखी कर दी गयी। नेयाज अहमद से पूर्व डीजीपी के दो पदों के विरुद्ध एक साथ तीन-तीन लोगों को प्रोन्नति दी गयी, जिनमें आरआर प्रसाद के अलावा जेबी महापात्रा और वीडी राम शामिल रहे। एजी से वेतन भुगतान पर रोक तो लगा ही, केंद्र ने राज्य सरकार को चेतावनी भी दी थी।ड्ढr झारखंड में सचिव, बिहार में विशेष सचिवड्ढr विभागीय सचिव के पदों पर भी प्रोन्नति देने में सरकार कभी पीछे नहीं रही। झारखंड में आइएएस अधिकारियों को इतनी प्रोन्नति मिली कि उसी बैच के अधिकारी आज जहां बिहार में विशेष सचिव के वेतनमान में हैं, झारखंड में सचिव के वेतनमान में।ड्ढr सभी विभागों के बाबुओं को मिली प्रोन्नतिड्ढr सचिवालय सहायकों का वेतनमान 5500 से बढ़ा कर 6500 किया गया। लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों को एसीपी का लाभ दिया गया। इसके अलावा सूबे में सिपाही से लेकर डीएसपी तक को प्रोन्नति का लाभ मिला।ड्ढr चौथे दर्जे के कर्मचारियों को कुछ नहींड्ढr राज्य बनने के आठ साल बाद भी सचिवालय के चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को एक भी एसीपी का लाभ नहीं मिला। यह अलग बात है कि इसमें तकनीकी रूप से सरकार के समक्ष भारी परेशानी है। उन्हें एक एसीपी का लाभ दिये जाने पर रुटीन क्लर्क के वेतनमान का लाभ मिलेगा, जो 4000 से 6000 है। दूसरा एसीपी मिलने पर 6500 से 10500 का। अब जिस संवर्ग में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी हैं, उसमें प्रमोशनल पोस्ट ही नहीं बताया जाता है। यह विसंगति सरकार के समक्ष दूसरी परेशानी रही।

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