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अंग प्रत्यारोपण कानून में बदलाव की कवायद

रोड़ों रुपये के किडनी रैकेट के पर्दाफाश के बाद अब सरकार ने अंग प्रत्यर्पण कानून में बदलाव की कवायद शुरू कर दी है। इस कवायद के तहत डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस (डीजीएचएस) आरके श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक दल पश्चिमी देशों के दौरे पर है। उल्लेखनीय है कि जनवरी माह में ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रत्यर्पण के लिए अंग की जबरदस्त की कमी की बात स्वीकारी थी, जिसके कारण कई जरुरतमंद मरीज जान गंवा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री अंबूमणि रामोदास ने कहा कि नई नीति के तहत दानकर्ता की निजी इच्छा (प्रीज्युम्ड कांसेंट) को तरजीह देने की बात की जा रही है। अभी भारत में दानकर्ता की निजी इच्छा की बजाय उनके परिवार वालों की इच्छा को तरजीह दी जाती है। जिसके तहत अगर व्यक्ित को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है तो उसके परिवार की इच्छा पर ही उसके अंगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। कई यूरोपिय देशों में दानकर्ता की निजी इच्छा पर ही उसके अंगों को निकाला जा सकता है। सरकार के इस फैसले के बाद अंगों की आस लगाए बैठे कई रोगियों को राहत मिल सकती है।

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